Saccha pyar kya hai- What is true love

सच्चा प्रेम क्या है|what is true love in hindi

Saccha pyar kya hota hai, what is true love in hindi
True love


सच्चा प्रेम ईश्वर द्वारा मनुष्य को दी गई सबसे बहुमूल्य उपहार है ।प्रेम ही वह फुल है जो मनुष्य के जीवन को खुबसूरत बनाता है । जी हाँ प्रेम ही वह खुशबू है जो मनुष्य के जीवन को खुशियों से भर देता है वास्तव में  प्रेम ही संसार की सभी खुशियों का सार है ।

प्रेम के कई रूप है |Pream ke roop

जैसे मां-बाप का अपने बच्चों के प्रति प्रेम, भाई-बहन का प्रेम, पति-पत्नी का प्रेम, दोस्ती का प्रेम, प्रेमी और प्रेमिका का प्रेम, भक्त और भगवान का प्रेम । परंतु प्रेम  चाहे किसी भी रूप में हो उसकी तो बस एक ही परिभाषा है समर्पण ।यानि किसी के प्रति सच्चें मन से समर्पित होना,और प्रेम सच्चा हो तो आनंद ही आनंद देता है ।

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आज कल का प्यार ...

Aajkal ka pyar

मगर आजकल तो प्यार की परिभाषा ही बदल गई है । कोई कहता है मुझे प्यार में केवल दर्द और गम ही मिला है, कोई कहता है मुझे प्यार में बर्बादी ही मिली है, तो कोई कहता है मुझे प्यार में हमेशा धोखा ही मिला है। परंतु मेरा कहना है कि इसका मतलब आपने प्यार किया ही नही था। आप तो व्यापार करने निकले थे जिसमे आपको नुकसान हो गया। आप तो केवल अपने मतलब के लिए प्यार करते थे और जहाँ मतलब हो वहाँ प्यार तो हो ही नही सकता।

Pyar me dard aur gam kyo ...

आजकल लोग प्यार को पाना चाहते है प्यार को बंधन में बांधना चाहते है मगर प्यार कोई बंधन नही है प्यार तो पंख देता है उड़ने के लिए । प्यार कोई चीज नही है जिसे हासिल किया जा सके प्यार तो एक एहसास है जो केवल महसूस किया जा सकता है ।दरअसल आजकल लोग आकर्षण और वासना को ही प्यार समझ बैठे है ,आकर्षण खत्म तो प्यार खत्म, वासना पुरी हुई तो प्यार खत्म ।और अगर वासना पुरी नही हुई तो फिर घृणा और ईष्र्या का जन्म होता है ।ऐसा प्यार आजकल एसिड अटैक, हत्या, आत्महत्या, और अपहरण जैसे समाजिक अपराधों का कारण बनता है । ऐसा प्रेम तो केवल दुख ही दे सकता है, बर्बादी ही दे सकता है ईसलिए ऐसे प्रेम को पाप समझा जाता है, इसलिए ऐसे प्रेम को बुरी नजर से देखा जाता है क्योंकि ये सच्चा प्रेम नही है।

सच्चे प्रेम की परिभाषा ...

Pream ki paribhasa

प्रेम तो पवित्र और पावन होता है ।सच्चा प्रेम तो इंसान को देवता बना देता है ।जिसने सच्चे प्रेम को समझ लिया उसे फिर और कुछ समझने की जरूरत ही नही है ।क्योंकि संत कबीर ने भी कहा है 

"पोथी पढ़ी पढ़ी जग मुआ, पंडित भया ना कोय "ढाई आखर प्रेम के, पढ़े सो पंडित होय"

लोग कहते है कि प्यार अधूरा होता है प्यार कभी पुरा नही होता परंतु ये बिल्कुल झुठ है क्योंकि प्यार कभी अधूरा नही हो सकता प्यार तो अपने-आप मे पूर्णता का एहसास है क्योंकि प्यार कोई मंजिल नही प्यार तो एक सफर है ।अगर सच्चे प्रेम का उदाहरण देखना हो तो राधा कृष्ण का प्रेम देख लो,श्री राम और शबरी का प्रेम देख लो,मीरा का प्रेम देख लो जो संसार में आज भी अमर है और युगों- युगों तक अमर रहेगा ।
इसलिए आप अगर प्रेम करों तो सच्चा प्रेम करो मगर प्रेम के नाम पर पाप मत करो क्योंकि प्रेम एक पुजा है ।बस मेरा यहीं कहना है ।

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