Diwali 2019 date and time -दिवाली पर निबंध

दिवाली कब है |Diwali 2020 date and time

Diwali kab hai, Diwali 2020 date
Diwali celebration


दिपावली  का त्यौहार हर वर्ष कार्तिक माह केअमावस्या के दिन मनाया जाता है। हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी दिवाली का त्यौहार 27 अक्टूबर दिन रविवार को बड़े ही  हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।इस पर्व में दीपक जलाने की परंपरा है, इसलिए इसे दीपावली भी कहा जाता है । यह पर्व भारत केअतिरिक्त मलेशिया ,मारिशस,सिंगापुर,पाकिस्तान  सहित दुनिया के लगभग  28 देशों में मनाया जाताा है। दिवाली दुुुनिया   केे लगलगभ 28 देशों में मनाया जाता है।

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• दिवाली का इतिहास 

 इस पर्व से सम्बंधित कई पौराणिक कथाएँ है। भागवत पुराण के कथानुसार कार्तिक अमावस्या के दिन ही समुद्र मंथन के द्वारा देवी लक्ष्मी का जन्म हुआ था इसलिए दिवाली में इनकी पुजा की जाती है। कहा जाता है कि जो भक्त दिवाली के दिन श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ देवी लक्ष्मी की पूजा करता है उसे धन वैभव और ऐश्वर्य  प्राप्त होता है । रामायण की कथा के अनुसार भगवान  श्री राम कार्तिक अमावस्या के दिन ही चौदह वर्षो का वनवास काट कर अयोध्या वापस लौटे थे । उनके आने के खुशी में पुरे अयोध्या की साफ-सफाई करके फूल मालाओं से सजाया गया था । धी के दीपक जलाये गये थे । तभी से दिवाली के उत्सव की शुरुआत हुई । द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण  ने कार्तिक अमावस्या के दिन ही नरकासुर का वध किया था। जैन धर्म के लोग इसे भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप मे मनाते है सिक्ख धर्म के लोग दिवाली को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाते है क्योंकि इसी दिन सिक्खों के छठे गुरू हरगोविंद सिंह जी  बंदीगृह से रिहा हुए थे।

• दिवाली का महत्व 

भले ही सभी धर्मो के लोग दिवाली को अलग-थलग मतों से मनाते है परंतु वे सब कार्तिक अमावस्या के घनघोर अंधेरे में दीप जलाकर अंधकार पर प्रकाश की,बुराई पर अच्छाई की,और अज्ञान पर ज्ञान की जीत का संदेश देते है । दिपावली से कुछ दिन पहले से ही सब लोग अपने-अपने घरों की साफ-सफाई करते है । हर तरह साफ-सफाई हो जाने से मच्छर -मक्खी और बिमारी फैलाने वाले कीटाणु नष्ट हो जाते है ।  इसलिए दिवाली का त्यौहार स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है  चाहे गरीब हो या अमीर सब अपने सामर्थ्य अनुसार नयी-नयी वस्तुएं खरीदते है। हर तरफ खुशी और उत्साह का माहौल होता है । दिवाली के दिन लोग नये-नये वस्त्र पहन कर मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करते है । दीप प्रज्वलित करते है और खुशी में पटाखे छोड़ते है । सब लोग एक दूसरे को मिठाई और उपहार देते है । जिससे समाजिक और परिवारिक रिश्तों में मधुरता आती है ।
दिवाली पर उपसंहार 
दिपावली का त्यौहार वैसे तो समाजिक सद्भाव और धार्मिकता का प्रतीक है परंतु लोगों की गलत मतों की वजह से इस पर्व के कुछ दुष्परिणाम भी देखने को मिलते है ।दिवाली के दिन कुछ लोग जुआ खेलना शुभ मानते है,लेकिन कई बार जुए की वजह से मारपीट की घटनाएँ भी सामने आती है । दिवाली की खुशी में भारी मात्रा में पटाखे छोड़े जाते है जिससे पर्यावरण प्रदूषित होता है और वातावरण जहरीली हो जाती है । जिसका हमारे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। तेज ध्वनि वाले पटाखों से ध्वनि प्रदूषण होता है। जिससे बुजुर्गो और रोगियों को काफी परेशानी होती है। पटाखों की वजह से कई बार अगलगी की घटना भी होती है ।जो की चिंता का विषय है । अगर हम सब इन छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर दिवाली मनाये तो दिवाली निश्चित ही हमारे लिए सुख-शांति और समृद्धि ले कर आती है ।


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