दशहरा पर निबंध | dussehra essay in hindi 2019

 दशहरा पर विशेष निबंध| dashara essay in Hindi

Dussehra essay in hindi
 Happy Dashara

 

दोस्तों हर साल दशहरा में विजयादशमी के दिन हमलोग रावण का पुतला दहन करते है, लेेेकिन क्या आप जानते है कि हमलोग उस दिन हम रावण का पुतला क्यों जलाते है ? चलिए मैं ही बता देेता हूँँ । हमलोग रावण का पुतला इसलिए जलातेे है कि रावण पापी और अधर्मी था।
उसने भगवान श्रीराम की पत्नी सीता का छल से अपहरण कर लिया था । तब भगवान श्रीराम ने रावण को उसकी राक्षसी सेना सहित मार कर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। चुकि भगवान श्रीराम ने दशमी के दिन ही रावण का वध किया था इसलिए हमलोग रावण के मृत्यु के दिन को विजयादशमी के रूप में मनाते हैं,और हमलोग विजयादशमी के दिन रावण के पुतले को जला कर अधर्म पर धर्म की और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देते है । परंतु अगर हम धर्म और निति से विचार करें तो हमे रावण का पुतला जलाने का कोई हक नही है । हमलोग बार-बार उसका पुतला जला कर उसके साथ सरासर अन्याय कर रहे है, क्योंकि रावण इतना भी बुरा नही था जितना हमलोग समझते हैंं । हां मैं मानता हूँ कि  उसने एक पराई स्त्री का अपहरण किया था और पराई स्त्री पर कुदृष्टि डालना पाप है परंतु उसने ये पाप केवल अपनी बहन के अपमान का बदला लेने के लिए किया था । आप खुद सोचिए कोई आपकी इकलौती बहन का नाक-कान काट कर कुरूप बना दे तो आप क्या करेंगे, और उसे तो उसके अपराध की सजा भगवान श्रीराम ने दे दी थी। फिर केवल एक गलती के लिए किसी को बार-बार सजा देना कहां तक न्यायोचित है। चलो मान लेता हूँ कि रावण का पुतला दहन करके हम बुराई और अधर्म का बहिष्कार करते है, लेेेकिन हमे रावण के साथ-साथ इंद्र का पुतला दहन करना चाहिए क्योंकि उसने भी गौतम ॠषि की पत्नी अहिल्या का छल से बलात्कार किया था और उसके साथ-साथ हमारे समाज में जो लाखों करोड़ो रावण है उन्हें भी जलाना चाहिए, क्योंकि धर्म और निति सबके लिए एक समान होनी चाहिए। खैर रावण में कुछ बुराई थी तो कुछ अच्छाई भी थी, परंतु आजकल का इंसान इतना पापी और अधर्मी है कि उसे देखकर रावण को भी शर्म आ जाए। मैं मानता हूँ कि रावण अहंकारी था परंतु वह अपने गुरुजनों और स्त्रियों का आदर करता था। वह महाज्ञानी और भगवान शिव का परम भक्त भी था। लेकिन आजकल का इंसान इतना घमंडी है कि अपने माता-पिता और स्त्रियों का आदर करना तो दूर की बात है वह भगवान को भी गाली देता है । ये सच है कि रावण ने सीता का हरण किया था मगर उसने कभी भी माता सीता को बुरी नीयत से छुआ तक नही था, लेकिन इस कलयुग का इंसान इतना पापी और वहशी है कि अपने बेटी समान छोटी-छोटी मासूम बच्चियों को भी अपने हवस का शिकार बना कर उसे वहशी जानवरों की भाँति हत्या कर देता है। अरे आज के इंसान से तो रावण अच्छा था। हम सभी जानते है कि हनुमान जी ने रावण के पुत्र अक्षय कुमार को मार डाला था, फिर भी उसने राजधर्म का पालन करते हुए दुत समझ कर हनुमान को मृत्युदंड नही दिया। आप खुद सोच सकते है कि आप अगर उसकी जगह पर रहते तो क्या करते। भगवान राम रावण के जानी दुश्मन थे उन्होंने रावण के पुत्रों और भाईयों को मार डाला था। परंतु उसने युद्ध निति का पालन करते हुए कभी भी रात को धोखे से राम की सेना पर आक्रमण नही किया । लेकिन आजकल का इंसान इतना कायर है कि हमेशा अपने दुश्मन के पीठ पर ही वार करता है। रावण अच्छा था जो अपने दसों चेहरे को सबके सामने रखता था परंतु आजकल के लोग तो एक चेहरे के पीछे ना जाने कितने चेहरे छुपाये हुए है, पता ही नही चलता कि कौन सा चेहरा असली है और कौन नकली।रावण पराक्रमी और महावीर भी था, उसने  अंत में अपनी हार निश्चित देखते हुए भी उसने हार नही मानी और अंत तक अकेला लड़ता रहा । भगवान श्रीराम ने भी उसकी वीरता और बहादुरी की प्रशंसा भी की थी ।अगर आप रावण के जीवन का गहराई से अध्ययन करेंगे तो आप उससे बहुत कुछ सीख भी सकते है ।

दोंस्तो मैनें अपना विचार आपके सामने रख दिया है अब कृपया कमेंट करके मुझे बताए कि क्या हमें रावण का पुतला जलाने का कोई हक बनता है। क्या हमें रावण का पुतला जलाने के बजाय अपने अंदर के रावण को नही जलाना चाहिए ।हमारे समाज में जो रावण छुपे हुए है क्या हमें उन सब को नही जलाना चाहिए । मुझे इसका जबाब चाहिए नही तो बंद करो दशहरे के नाम पर लाखों करोड़ो रुपये बर्बाद करना,क्योंकि जब तक हम अपने अंदर की बुराई को नही जलाते रावण कभी मर नही सकता ।
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