how to live tension free life in hindi| तनावमुक्त जीवन जीने के 12 सूत्र

how to live tension free life in hindi

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जीवन के 12 सूत्र


दोस्तों
हमारी ये जिंदगी बहुत खुबसूरत है। और हम सभी इस खुबसूरत जिंदगी को सुुुुुख-चैन से जीना चाहते हैं लेकिन हम अपनी अज्ञानता और नासमझी के कारण इस खुबसूरत और बहुमूल्य जीवन का भरपूर आनंद लेने के बजाय इसे अशाांति, निराशा,चिंता तनाव और दुखों से भर लेते हैं। जिसके फलस्वरूप हमारा ये खुबसूरत जीवन नीरस और दुखमय लगने लगता है। कहा जाता है कि जिंदगी जीना एक कला है और जो व्यक्ति इस कला को जानता है वही व्यक्ति जिंदगी का भरपूर आनंद ले सकता है। तो अगर आप भी इस कला को सीखना चाहते हैं तो तैयार हो जाईए। इस आर्टिकल में हम आपको जीवन जीने के इस कला के 12 सुत्र बताने वाले हैं जिनको अपनाकर आप एक खुशहाल और तनावमुक्त जीवन जी सकते हैं।

जिंदगी का पहला सूत्र है- 'समस्याओं को स्वीकार करों '

 सबसे पहले हमें ये समझना होगा की जीवन है तो समस्याएं हैं और समस्याएं हैं तो जीवन है। बिना समस्याओं के जीवन का कोई महत्व ही नहीं है। समस्याएं हमें हमारे जीवन का उद्देश्य बतातीं है। हमें यह सोचना चाहिए कि समस्याएं सिर्फ जीवन में ही नहीं है बल्कि दुनिया के सभी प्राणियों के लिए है। इस दुनिया के सभी जीवित प्राणियों को जीने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है इसलिए कहा जाता है कि संघर्ष ही जीवन है। अतः हमें अपने जीवन की समस्याओं से दुखी होने के बजाय मुस्कुराकर उनका स्वागत करना चाहिए। अगर हम अपने जीवन में आने वाली छोटी-छोटी समस्याओं को खुले दिल से स्वीकार कर लेते हैं तो हमारा हौसला और आत्मविश्वास बढ़ जाता है और हम भविष्य में आने वाली बड़ी चुनौतियों के लिए तैयार हो जाते हैं। 

जीवन का दूसरा सूत्र है- अहंकार का त्याग
हमारे जीवन के अधिकतर दुखों का कारण हमारा अहंकार ही होता है। अपने अहंकार की वजह से हम खुद को दूसरों से बड़ा और श्रेष्ठ समझने लगते है और यहीं से हमारे दुखों में वृद्धि होने लगती है। अहंकार की वजह से हम ना तो दूसरों की गलतियों को माफ कर पाते हैं और ना ही अपनी गलतियों के लिए दूसरों से माफी मांग पाते हैं।‌अहंकार की वजह से हमें अपनी गलतियां दिखाई नही देती और हम अपनी गलतियों से सीख नहीं पाते। हमारा अहंकार हमारे पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों मनमुटाव और कलह पैदा कर हमें अकेला कर देता है। यहां हमें ये समझने की जरूरत है कि इंसान गलतियों का पुतला है और गलतियां इंसानों से ही होती है। इसलिए हमें अहंकार का त्याग करके अपनी गलतियों के लिए दूसरों से माफी मांग लेनी चाहिए और दूसरों की गलतियों को माफ करके उन्हें भी सुधरने का मौका देना चाहिए। अगर हम अपने जीवन से अहंकार का त्याग कर दें तो जीवन को काफी सरल और आनंदमय बनाया जा सकता है।

जीवन का तीसरा सूत्र है - आर्थिक रूप से सबल होना,

आज के वक्त में हर कोई धन की उपयोगिता से परिचित है। हमारे जीवन की‌ आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हमारे पास पर्याप्त मात्रा में धन का होना अनिवार्य है। धन के अभाव में
हम सुखी और तनावमुक्त जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। क्योंकि धन हमें और हमारे परिवार को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है। इसलिए हमें‌ अपने सामर्थ्य अनुसार से अधिक से अधिक धन अर्जित करने की चेष्टा करनी चाहिए। इसी प्रकार हमें अपने धन का कुछ हिस्सा भविष्य के लिए संचय करना चाहिए और  कुछ हिस्से से अपने सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करनी चाहिए। परंतु ध्यान रहें- अनीति, अधर्म, और अनुचित तरीकों से अर्जित किया हुआ धन आपके जीवन में कई तरह के विकारों को जन्म देता है, जो अंततः आपके पतन का कारण बनता है।

जीवन का चौथा सूत्र है- छोटी-छोटी बातों को नजरंदाज करना'
कई बार हम बिना मतलब ही उलझते रहते हैं, झगड़ते रहते हैं और अपने असली मकसद से पीछे छुट जाते हैं। हमें ये समझना चाहिए कि ये जिंदगी एक सफर है और इस सफर में अच्छे-बुरे भले सभी तरह के लोग मिलते हैं। और हर किसी की सोच अलग अलग है। हर किसी के स्वभाव‌ अलग अलग है। अगर हम हर जगह हर किसी से छोटी-छोटी बातों पर लड़ते-झगड़ते रहे तो हम जीवन में पीछे रह जाएंगे।इसलिए एक शांत और सुखी जीवन जीने के लिए‌ हमे लोगों की नकारात्मक बातों पर ध्यान देने के बजाय नजरंदाज कर देना चाहिए।

जीवन का पांचवां सूत्र है- संतोष के साथ जीवन जीना।
‌हमारे जीवन में कई बार ऐसा होता है कि हम जैसा चाहते हैं या जैसा सोचते हैं वैसा नहीं हो पाता या हमारे कुछ सपने, कुछ ख्वाहिशें अधूरी रह जाती है। यहां हमें समझने की जरूरत है कि दुनिया में सबकुछ हमारे इच्छा अनुसार नहीं हो सकता, क्योंकि कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो हम इंसानों के वश में नहीं होती और जो हमारे वश में ही नहीं है उसके लिए रो-रोकर और चिंता करके जीवन को नरक बनाने से बेहतर है, जो मिला है उसी से संतोष कर लिया जाए। मगर ध्यान रहें संतोष का अर्थ यह नहीं है कि आप परिश्रम करने के बजाए भाग्य केे भरोसे बैठ जाएं। संतोष का अर्थ है कि जो मिला है उसी में संतुष्ट एवं खुश रहना।

जीवन का छठा सूत्र है- दूसरों से अपनी तुलना ना करें।

ईश्वर ने इस सृष्टि में सभी प्रकार के इंसान बनाए हैं, कोई बहुत सुंदर है, कोई कम सुंदर है तो कोई कुरूप है। कोई लम्बा है, कोई छोटा है। कोई अमीर है, तो कोई गरीब है। ईश्वर ने हम सबको हमारे पुर्वकर्मो और योग्यता के आधार पर अलग अलग विशेषताओं के साथ बनाया है, इसलिए अपनी तुलना किसी और से करके निराश होने के बजाय अपने अंदरुनी गुणों को निखारने का प्रयास करें, क्योंकि बाहरी सुंदरता वक्त के साथ ढल जाती है लेकिन अंदरुनी सुंदरता जीवन भर साथ रहती है। याद रखें - अपनी तुलना किसी और से करके आप अपने साथ साथ ईश्वर का भी अपमान करते हैं। क्योंकि ईश्वर ने हर इंसान को किसी खास उद्देश्य से बनाया है, इसलिए हमेशा अपने अंदर खुशी ढुढने का प्रयास करें, एवं हमेशा खुश रहें।

जीवन का सातवां सूत्र है। - उम्मीद का दामन थामे रखना।

हमारी जिंदगी में कभी कभी ऐसा समय आता है कि हम जीवन से निराश हो जाते हैं। हमें लगता है कि हम चारों ओर से समस्याओं से घिर गए हैं। हमें हर तरफ़ अंधेरा ही अंधेरा नज़र आता है। ऐसे समय में हमें घीरज रखना चाहिए और ये उम्मीद रखना चाहिए कि सब ठीक हो जाएगा। हमें किसी भी हाल में निराश हो कर उम्मीद का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। हमें एक बात हमेशा याद रखना चाहिए कि वक्त चाहे कितना भी बुरा हो लेकिन धीरे-धीरे गुजर ही जाता है। हमें ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए कि ईश्वर जो करेंगे अच्छा ही करेंगे।

जीवन का आठवां सूत्र है- किसी से भी उम्मीद ना रखें।

कई बार हम अपने परिजनों, दोस्तों या रिश्तेदारों से बहुत ज्यादा उम्मीद लगा लेते हैं, और जब वे हमारे उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाते तो हमें बहुत दुःख होता है। हमें लगता है कि उन्होंने हमारे साथ छल किया है, मगर सच्चाई ये है कि कोई भी इंसान चाहे कितना भी कोशिश कर ले लेकिन वह हर बार हर किसी की उम्मीदों पर खरा उतर ही नहीं सकता। क्योंकि दुनिया में हर कोई अपनी जिंदगी में किसी ना किसी समस्या का सामना कर रहा होता है। यहां तो लोग अपनी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं दूसरे की तो बात ही क्या है। इसलिए हमें दूसरों से उम्मीद रखने के बजाय खुद से उम्मीद रखना चाहिए।

जीवन का नौवां सूत्र है। अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण।
इंसान के दुखों का सबसे बड़ा कारण है, उसकी असिमित इच्छाएं जो इंसान को शांति और सुकून के साथ जीने नहीं देती और इंसान को जीवन भर भौतिक सुखों की मृगतृष्णा में भटकाती रहती है। कुछ बुद्धिजीवी लोगों का कहना है कि इंसान अगर इच्छा नहीं रखेगा तो जीवन का विकास कैसे होगा। परंतु वास्तव में विकास इच्छा से नहीं आवश्यकता से होता है। फिर भी अगर हम अपनी इच्छाओं को महत्व देते हैं तो भी उन पर नियंत्रण रखना आवश्यक है। आज हमारे समाज में जो दुःख, निराशा,भय, अशांति, हिंसा और अपराध है वे सब इंसान की असिमित इच्छाओं का दुष्परिणाम है। इसलिए अपनी चंचल इंद्रियों पर नियंत्रण करने का प्रयास करें।

जीवन का दसवां सूत्र- बुरी यादों को भूलना

दोस्तों हम सब अच्छी तरह से जानते हैं कि जो अच्छा या बुरा समय बीत गया, उसे वापस नहीं लाया जा सकता फिर भी हम बीतीं यादों को बार बार याद करके दुःखी होते रहते हैं। जिसके कारण हमारा वर्तमान भी दुखमय हो जाता है। एक बात हमेशा याद रखें- जीवन एक रेल के सफर के जैसा ही है और इस सफर में हम जितना कम बोझ लेकर चलेंगे सफर उतना ही आनंददायक होता है। इसलिए हमें बुरी यादों के गट्ठर को फेंक कर हमेशा खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए।

जीवन का ग्यारहवां सूत्र- समझदारी से काम लेना,


श्वर ने हमें बुद्धि इसलिए दिया है की हम अपनी बुद्धि का उपयोग करके अपने जीवन को आसान बनाएं। हमारे जिंदगी में कई बार ऐसी चुनौतियां आती है जिनसे निपटने के लिए बल की नहीं बुद्धि की जरूरत पड़ती है। मान लीजिए आप कही जा रहे हैं और  रास्ते में समुद्र है तो समझदारी इसी में है कि हम किसी नाव या जहाज में बैैठ कर उस पार उतर जाएं, ना की हम समुद्र को खाली करने का प्रयास करें। ‌ इसी तरह हमारी जिंदगी में भी कई ऐसी बड़ी चुनौतीयां आती है। जो हमारे क्षमता से अधिक बड़ी होती है, ऐसे में हमें बल-प्रयोग करने के बजाए बुद्धि का उपयोग करना चाहिए। याद रखें- जो काम बुद्धि से हो सकता है वह बल से कभी नहीं हो सकता।

जीवन का बारहवां सूत्र- तन और ‌मन को स्वस्थ रखना,


सुखी और तनावमुक्त जीवन के लिए तन और ‌मन का स्वस्थ होना सबसे जरूरी है क्योंकि स्वस्थ और स्वच्छ तन-मन सुखी जीवन के इमारत के दो मजबूत स्तंभ है। इसलिए हमें अपने आयुर्वेद के नियमों के अनुसार अपने शरीर को निरोग रखना चाहिए।‌ यानी हमें नियमित रूप से संतुलित और पौष्टिक आहार ग्रहण करना चाहिए, एवं अशुद्ध और तामसी आहारों का त्याग करना चाहिए। हमें प्रात: उठकर व्यायाम करना चाहिए‌ एवं मेडिटेशन करना चाहिए और। स्वस्थ मन से अभिप्राय यह है कि हमारा मन निर्मल, निश्छल, निष्पाप और निर्विकार होना चाहिए। हमें अपने मन से सभी प्रकार की बुराईयों को दूर करके मन, वाणी और कर्म से सबको सुख पहुंचाने का यत्न चाहिए।

तो दोस्तों अगर आप इन 12 सूत्रों को अपने जीवन में उतार लें तो आप निसंदेह एक खुशहाल और तनावमुक्त जीवन जी पायेंगे।

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