Loneliness| जाने अकेलेपन और एकांत के बीच अंतर



Akelapan aur akant,akele Khush rahna sikhen
Loneliness and Secluded

अकेलापन या एकांत


दोस्तों मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है जिसे हमेशा से समाज के बीच रहना पसंद है। एक दुसरे से मिलना जुलना,एक दुसरे से बाते करना, और एक दूसरे के साथ रहना,ये हमारे जीवन का एक हिस्सा है या यूं कहें कि हमारी जरूरत है। अकेले रहना हमारे लिए एक सजा की तरह है, यहीं वजह है कि जेलों में दुर्दांत अपराधियों को सजा के तौर पर अकेले में रखा जाता है। अदि हमारे घर में कोई अकेलेपन का शिकार हो जाएं तो उसे किसी मनोचिकित्सक से दिखाया जाता है। अकेलेपन की समस्या आज पूरी दुनिया में इस कदर बढ़ चुकी है कि लोग इसे एक बिमारी का दर्जा दे चुके है।


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तो इस आर्टिकल में हम इसी विषय पर चर्चा करेंगे कि क्या सचमुच अकेलापन हमारे लिए एक समस्या बन चुका है या हमारे व्यक्तित्व में ही कोई बुनियादी कमी है। कहीं ऐसा तो नहीं की हमारे सोचने का नजरिया ही गलत है। वैसे भी इस विषय पर अध्यात्मिक विचारकों और मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों के बीच काफी मतभेद है। अमेरिका के मशहूर लेखक डेल कार्नेगी अपनी एक पुस्तक में लिखते हैं कि अकेलापन एक ऐसी मनोदशा है जो मनुष्य को खालीपन का एहसास कराता है। जिसके कारण उसके मन में अजीब-अजीब ख्याल आने लगते है। उन्होंने अकेलेपन को आत्महत्या और डिप्रेशन के लिए एक बड़ी वजह बताया है।


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वहीं प्रसिद्ध अध्यात्मिक गुरु ओशो अकेलेपन को एकांत का नाम देते हैं। वे कहते हैं कि एकांत हमारे लिए एक सुनहरा अवसर है, अपनी रचनात्मक प्रतिभा को विकसित करने के लिए या आत्मज्ञान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए। वे कहते है कि मतलबी और स्वार्थी लोगों के साथ रहकर उनसे झूठी और फिजूल करने से बेहतर है कि आप एकांत में अधिक से अधिक समय बिताए । और जो लोग अध्यात्मिक प्रगति  के पथ पर अग्रसर होना चाहते हैं, उनके लिए एकांत में रहना बेहद जरूरी है क्योंकि एकांत में ध्यान साधना काफी सरल हो जाती है।


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तो दोस्तों अब आपके मन में ये प्रश्न उठ रहा होगा कि अकेलापन और एकांत में क्या भेद है। देखिए वैसे तो अकेलापन और एकांत दोनों समानअर्थी शब्द है। परंतु इनके अर्थ में ज़मीन आसमान का अंतर है। अभिप्राय यह है कि जब हम बाहरी दुनिया की ओर आकर्षित रहते हैं तब हम एकांत में अकेलापन महसूस करते है। परंतु जब हम अकेलेपन के दौरान आंतरिक जगत में खो जाते हैं तो हम एकांत में भी एक अद्भुत आनंद को अनुभव करते है। एकांत में आत्मज्ञान स्वत: और सहज ही उपलब्ध हो जाता है परंतु अकेलेपन में व्यर्थ के नकारात्मक विचार परेशान करने लगते हैं। इसलिए अकेलापन एक सजा लगने लगता है।। क्योंकि अकेलेपन में घबराहट हैं,भय है और चिंता है। लेकिन इसके विपरीत एकांत में शांति है,सूकन है और आनंद है।


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वास्तव में जीवन अकेलेपन से एकांत की ओर एक सुखद यात्रा है। और जीवन की इस यात्रा में हम जितना एकांतप्रिय बनेंगे,उतनी हमारी जरूरतें कम होगी और जितनी हमारी जरूरतें कम होगी हमारा सफर उतना ही आसान और सुखदाई होगा। याद रखें हमारी खुशी दुसरो पर निर्भर नहीं है।‌ हमारी खुशी हमारे भीतर मौजूद हैं इसलिए जितना हम इस संसार के बंधनों से मुक्त होंगे उतना ही हमें एकांत में रहने का आनंद मिलेगा। अगर हम अकेलेपन को एकांत में तब्दील कर पाएं तो  फिर अकेलापन हमारे लिए वरदान साबित हो सकता है।


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