motivational story in hindi for success| इस कर्मचारी को बॉस ने अपनी 1 करोड़ की कार गिफ्ट कर दी

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कहते हैं कि जिंदगी हर loser को कम से कम एक मौका जरूर देती है जिसमें वह winer बन सकता है। लेकिन बहुत कम लोग ही उस मौके का फायदा उठा पाते हैं। और उस मौके का फायदा वहीं लोग उठा पाते हैं जिनके अंदर अपने काम के प्रति सच्ची लगन और कर्तव्यनिष्ठा होती है और इसी का उदाहरण देने के लिए आज मैं आपके लिए एक ऐसे ही loser की सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूं जिसने इस मौके को भुनाने के लिए ऐसा अद्भुत काम कर दिखाया जो हमेशा के लिए एक मिसाल बन गई। 

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ऊपर तस्वीर में दिख रहे लड़के का नाम है (Walter Carr) वाल्टर कार । वाल्टर का घर लुसियाना प्रांत के न्यू ओर्लियंस(अमेरिका) में था लेकिन अगस्त 2005 में आए हरिकेन कंट्रीना चक्रवात में इनका घर तबाह हो गया था। इसलिए वाल्टर को अपने माँ के साथ अलबामा राज्य में आना पड़ा। यहां उन्होंने एक छोटे से कस्बे होमवुड (hombood) में अपना घर बनाया और दोनों मां-बेटे रहने लगे।




अल्बामा में वाल्टर का जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा। पैसे की कमी की वजह से उनको काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वाल्टर बचपन से ही मेहनती, दयालु, विनम्र और हंसमुख थे। वे पढ़-लिख कर अपने माँ का सहारा बनना चाहते थे। लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से उनके सामने कई चुनौतियां थीं। इसलिए वे पढ़ाई के साथ-साथ किसी जाॅब की तलाश भी करने लगे।  एक दिन वाल्टर को पता चला कि सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने वाली प्रसिद्ध कंपनी Bellhops में एक वेकन्सी खाली थी। लेकिन समस्या यह थी कि बेलहॉप्स का ऑफिस उनके घर से काफी दूर था।


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वाल्टर के पास एक पुरानी हालत वाली खटारा कार थी। जिसे लेकर वे बेलहॉप्स के ऑफिस के लिए निकल पड़े। वहां पहुंचकर उन्होंने एप्लीकेशन फॉर्म भरा और इंटरव्यू दिया। खुशकिस्मती से उन्हें नौकरी मिल गई और अगले ही दिन से काम पर बुला लिया गया। नौकरी के पहले दिन उन्हें सीधे पाल्हम शहर बुलाया गया था। जहां से उन्हें अपने ग्राहक जेनी हेडेन लैमी के घर से सामान उठाना था। वाल्टर ने शायद सोचा नहीं था कि उसे इतनी जल्दी काम मिल जाएगा इसलिए वह बहुत खुश था।


लेकिन उसकी यह खुश ज्यादा देर तक नहीं रही। क्योंकि उसी रात को वाल्टर की कार ऐसी खराब हुई कि दोबारा चलने के लायक ही नहीं रही। उस वक्त वाल्टर के पास पैसे भी नहीं थे कार को ठीक कराने के लिए क्योंकि पिछले एक महीने से उसके घर की माली हालत काफी बदतर थी। लेकिन उसे इस नौकरी की भी बहुत जरूरत थी। जीवन के इस कठिन घड़ी में उसने फैसला किया कि वह किसी भी हालत में सुबह तक सही समय पर यानी 8 बजे तक अपने ग्राहक के घर जरूर पहुंचेगा। वाल्टर के घर होमवुड से पेल्हाम की दूरी लगभग  20 मील (32 किलोमीटर) थी।


अब वाल्टर का लक्ष्य था 7 घंटे में 32 किलोमीटर पैदल चल कर जाना। उसने रात 8:00 खाना और 12:00 बजे का अलार्म लगाकर सो गया। करीब 4 घंटे सोकर उसने रात के 12 बजे उठकर तैयारी की और घर से चल पड़ा। शुरू-शुरू में तो वह काफी तेज चला लेकिन धीरे-धीरे उसके पैर थकने लगे। लेकिन वह रूका नहीं। लगभग 22 किलोमीटर चलने के बाद वाल्टर की हालत काफी बुरी हो गई। अब उसकी टांगें लड़खड़ाने लगी। सारा बदन पसीने से लथपथ हो चुका था।


उसे लग रहा था कि उसके पांव जल रहे थे, लेकिन फिर भी वह धीरे-धीरे चलता ही जा रहा था। चलते चलते सुबह के साढ़े-चार बज गए थे। अब वह अपने लक्ष्य के काफी करीब था। इसलिए थकान से हारा हुआ वाल्टर एक जगह बैठकर थोड़ा सुस्ताने लगा। तभी सायरन की आवाज आई और पुलिस की गाड़ी उसके पास आकर रुकी। वाल्टर पीछे मुड़ा तो कार का शीशा नीचे करके पुलिसवाले ने पुछा,


"किधर जा रहे हो लड़के?"

वाल्टर ने चलते-चलते अपनी कंपनी का नाम बता दिया।


गाड़ी में सवार पुलिसवाला शॉन ग्रे भी रात भर की ड्यूटी के बाद थका हुआ था। उसने वाल्टर की हालत को देखते हुए कार में बैठने को कहा। वाल्टर ने सांस ली और शॉन को रात भर चलने का कारण बताया। कारण सुनकर शॉन बेहद हैरान हुआ लेकिन उसने व्यक्त नहीं किया। बाकी के पूरे रास्ते दोनों में बात नहीं हुई और आखिर समय से काफी पहले ही वाल्टर पहले ग्राहक के घर पहुँच गया।


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वाल्टर शॉन को शुक्रिया कहकर कार से निकल गया, लेकिन शॉन उसे ग्राहक के दरवाजे तक छोड़ने आया। ग्राहक जेनी हेडेन ने दरवाजा खोला तो शॉन ने उसे वाल्टर द्वारा रात भर चलने की बात बताई।


शॉन की तरह जेनी भी हैरान थी। जेनी ने वाल्टर से कहा कि जब तक बाकी टीम नहीं आ जाती तब तक वह ऊपर जाकर आराम करें लेकिन वाल्टर ने विनम्रता से मना कर दिया। उसने कहा कि वह काम शुरू कर सकता है। अतः वाल्टर ने जेनी और उसके बेटे क्रिस हेडेन के साथ मिलकर सामान पैक करना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद बेलहॉप्स की बाकी टीम वहां पहुंच गई और वे भी वाल्टर की प्रतिबद्धता और साहस से काफी प्रभावित हुए। फिर सभी ने पैक सामान को वैन में रखना शुरू किया।


जेनी ने अगले दिन वाल्टर की इस कर्तव्यनिष्ठा के बारे में Facebook पर एक पोस्ट लिखी। जेनी इतनी भावुक थी कि उसने वाल्टर को वित्तीय सहायता दिलाने के लिए जरूरतमंदों को वित्तीय मदद उपलब्ध कराने वाली संस्था Gofundme की वेबसाइट पर उसके नाम पर एक अकाउंट बना दिया।


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जेनी के फेसबुक पोस्ट को पढ़कर वाल्टर की मदद करने के लिए लोग उमड़ पड़े। वाल्टर की कार की मरम्मत के लिए GoFundMe अकाउंट पर $2,000 डोनेशन की जरूरत लिखी थी, लेकिन $90,000 की डोनेशन आई। वाल्टर ने उस रकम में से $25000 छोटे-छोटे अनाथ बच्चों को एजुकेशन देने वाली एक संस्था को डोनेट कर दिया।


इसके बाद बेलहॉप्स कंपनी के CEO लूक मार्कलीन ने खुद आकर वाल्टर से मुलाकात की और उसे अपनी कीमती कार तोहफे में दे दी। हालांकि वाल्टर ने काफी ना-नुकुर की लेकिन आखिरकार उसे अपने बॉस की बात माननी ही पड़ी। इसके बाद कई न्यूज़ चैनलों ने  उसका इंटरव्यू लिया और उससे सम्मानित भी किया। आज वॉल्टर बेलहाप्स कंपनी में एक बड़े पद पर नौकरी कर रहा है।


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दोस्तों आज के दौर में जहां तकरीबन 99% कर्मचारी जानबूझकर दफ्तर लेट जाते है और समय से पहले ही दफ्तर से निकल जाते है, दफ्तर में ज्यादातर समय गप्पे लड़ाते हैं, काम से बचने हेतु तरह-तरह के बहाने बनाते हैं। ऐसे में वाल्टर कार ने कर्तव्य निष्ठा और प्रतिबद्धता की एक अनूठी मिसाल पेश की है। जिससे हम सब को सीख लेनी चाहिए। तो दोस्तों उम्मीद है कि इस Motivational story को पढ़ कर आपने जरूर कुछ सीखा होगा। अगर इस कहानी ने आपको inspire किया है तो कृपया नीचे कमेंट करके‌ हमे

भी बताएं कि आप अपने काम के प्रति कितने समर्पित है। 


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