सकारात्मक सोच की कला | 10 powerful tips-positive thinking in hindi

सकारात्मक सोच कैसे विकसित करें |positive attitude development

Positive thinking in hindi, how to stay positive
Think positive

आजकल हमारी दुनिया बहुत बुरे दौर से गुजर रही है। हम प्रतिदिन टीवी चैनल और अखबारों में हत्या, आत्महत्या, लूट, भ्रष्टाचार, अपहरण, बलात्कार, आतंकवाद, महामारी जैसे नकारात्मक खबरें देखते रहते हैं। ऐसी खबरें हमारे सोच को इतनी बुरी तरह से प्रभावित करती है कि हमें नकारात्मक सोचने की आदत पड़ जाती है। जिसके फलस्वरूप हम हमेशा भय, आशंका, असुरक्षा और निराशा से घिरे रहते हैं। क्योंकि जिस प्रकार काले रंग के चश्मे से हमें सब कुछ काला और लाल रंग के चश्मे से हमें सब कुछ लाल ही दिखाई देता है। उसी प्रकार निगेटिव सोच से हमें अपने चारों ओर निराशा, दुःख और असंतोष ही दिखाई देता है और पाज़िटिव सोच से आशा, खुशियां और संतोष दिखाई देता है।

निगेटिव सोच उसी काले चश्मे की तरह है। जिसे पहनने पर हमें हर तरह अंधेरा ही अंधेरा नजर आता है। और जब हमें निगेटिव सोचने की आदत पड़ जाती है। तो हम अपने जीवन से जुड़े हर विषयवस्तु को नकारात्मक दृष्टिकोण से देखने लगते हैं। इस तरह हम अपने अच्छे खासे जीवन को नरक बना लेते हैं। ऐसे में positive thinking हमारे लिए एक बेहतरीन विकल्प है जो हमें आशा, विश्वास और सुकून देता है ‌लेकिन positive thinking कोई जादुई मंत्र नहीं है जिसे बोलने से हमारे अंदर Positive attitude आ जाएगी। यह एक ऐसी आदत है जिसे आपको अपने स्वभाव में विकसित करना पड़ता है। और जब यह आदत आपके स्वभाव में शामिल हो जाती है तो आप एक पाज़िटिव सोच वाले व्यक्ति बन जाते हैं। जो जीवन के बुरे से बुरे हालातों में भी निराश नहीं होता। जो अपने जीवन की हर समस्या में सामाधान और हर चुनौती में संभावनाएं देखता है। लेकिन यह केवल सुनने या पढ़ने से नहीं हो सकता। इसके लिए कुछ techniques है, जिसे आपको daily अभ्यास करना पड़ेगा। तो दोस्तो आज मैं आपको positive thinking development के लिए 10 powerful टिप्स के बारे में बताऊंगा। जिसे मैं खुद फाॅलो करता हूं।

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10 powerful tips for positive thinking in hindi

  1. सकारात्मक सुबह से शुरूआत करें

क्या आपके साथ कभी ऐसा होता है कि किसी दिन आपके साथ सब-कुछ गलत ही गलत होता है। और आप कहते हैं कि आज का दिन ही खराब है। यहां अगर आप घ्यान दें तो इस बात की पुरी संभावना है कि आपने दिन की शुरुआत नकारात्मक भावना और निराशावादी दृष्टिकोण से की थी। इसलिए अपने दिन की शुरुआत सकारात्मक सोच से करें।


सुबह उठकर सबसे पहले अपने बेहतर जीवन के लिए ईश्वर का शुक्रिया अदा करें। उसके बाद आईने के सामने खड़े होकर मुस्कुराएं और खुद से कहें, आज का दिन मेरे जीवन का सबसे खूबसूरत दिन है। और मैं इस दिन को और भी बेहतर बनाने जा रहा हूं। अपनी सुबह को खुबसूरत बनाने के लिए हर सुबह कुछ ऐसा करें जिससे आपको खुशी और सुकून मिलता हो। जैसे- अपने मनपसंद गाने सुनना, प्रकृति के बीच समय बिताना, मेडिटेशन करना, व्यायाम करना और किताबें पढ़ना। आप कुछ दिन ऐसा करके देखिए कुछ दिनों बाद आप खुद हैरान रह जाएंगे कि आपका दिन पहले से कितना बेहतर हो गया है।



  1. समस्याओं का आनंद लें।

आपको यह सुनते में थोड़ा अजीब लगेगा लेकिन यह बिल्कुल सच हैं क्योंकि मैं खुद ऐसा करता हूं और यदि मैं कर सकता हूं तो आप भी कर सकते हैं। लेकिन उससे पहले आपको इस बात को स्वीकार करना होगा कि समस्याएं और मुश्किलें जीवन का एक हिस्सा हैं और हर इंसान को इनसे गुजरना पड़ता है। इसलिए जब आप इनका सामना करते हैं, तो इनके सकारात्मक पहलुओं पर अपना ध्यान केंद्रित करें,क्योंकि हर समस्या का एक सकारात्मक पहलू भी होता है। यानी आपकी हर समस्या में एक लाभ छुपा होता है।


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उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि यदि आप ट्रैफ़िक में फंस जाते हैं, तो परेशान होने के बजाय यह सोचें कि आपके पास अपने पसंदीदा गानों को सुनने का समय हैं। इस प्रकार आप अपनी छोटी-छोटी परेशानियों को खुशियों में बदल सकते हैं। और यदि आप ऐसा कर सकते हैं तो निश्चित रूप से आपकी सोच में सकारात्मकता आएगी। 


  1. अपने विचारों को लिखने की आदत डालें

आपके मन में हर पल इतनी तेजी से विचार बदलते रहते हैं कि आपको उनका विश्लेषण करने का समय ही नहीं मिलता इसलिए अपने विचारों को प्रतिबिंबत करने के लिए एक डायरी में अपने विचारों और भावनाओं को लिखें और फुर्सत के क्षणों में उनके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं पर चिंतन करें। इस तरह आप अपने नकारात्मक विचारों पर नजर रख सकते हैं और उनका मूल्यांकन भी कर सकते हैं। प्रतिदिन केवल बीस मिनट का समय देकर आप अपने नकारात्मक विचारों की पहचान करके उन्हें सकारात्मक विचारों में बदल सकते हैं। मैं इस प्रयोग को लगभग डेढ़ साल से कर रहा हूं। और मैनें अनुभव किया है कि हमारे दिमाग में आने वाले 90% नकारात्मक विचारों के पीछे कोई प्रामाणिक कारण नहीं होता, यानी वे केवल काल्पनिक और महत्वहीन होते हैं। उनका हमारे जीवन से कोई संबंध नहीं होता। तो आप खुद इस प्रयोग को करके अनुभव कर सकते हैं।


  1. सकारात्मक लोगों के बीच रहें


आपका व्यक्तित्व कैसा है, यह काफी हद तक इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप कैसे लोगों के बीच रहते हैं। यदि आप ऐसे लोगों के बीच रहते हैं जो हमेशा समस्याओं का रोना रोते रहते हैं अथवा हमेशा नकारात्मक बातें करते रहते हैं तो आप स्वयं को निगेटिविटी से नहीं बचा पाएंगे इसलिए नकारात्मक लोगों से दुर रहने का प्रयास करें और आशावादी लोगों के बीच ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। उनके सकारात्मक विचार आपके सोच को भी निश्चित रूप से प्रभावित करेंगे।


  1. खुद को सम्मान दें


मैं काला हूं, मैं नाटा हूं, मैं पढ़ाई में कमजोर हूं, मैं गरीब हूं। इस तरह के निराशावादी विचार आपके अंदर नकारात्मक विचारों को जन्म देते हैं। और यदि ऐसे ही अपने अंदर की कमियों को याद करते रहेंगे तो आप जीवन की वर्तमान खुशियां को भी खो देंगे। इसलिए अपनी कमियों को कुछ इस तरह से देखें, मैं काला हूं लेकिन मैं पढ़ने में काफी तेज हूं। मैं नाटा हूं लेकिन मेरा शरीर स्वस्थ और फिट है। मैं पढ़ाई में कमजोर हूं लेकिन मैं खेलने में बहुत तेज हूं। मैं गरीब हूं लेकिन मैं स्वाभिमानी और ईमानदार हूं। अगर आप इस तरह से सोचेंगे तो आप खुद को बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर पाएंगे। याद रखें इस दुनिया में कोई भी व्यक्ति परफेक्ट नहीं है, हर व्यक्ति के जीवन में कुछ ना कुछ कमियां जरुर है। इसलिए अपनी तुलना किसी और से करके अपने अस्तित्व को अपमानित ना करें। 


  1. मेडिटेशन का अभ्यास करें


 मन में उठते नकारात्मक विचारों को नियंत्रित करके अपने मन को स्थिर और शांत करने के लिए मेडिटेशन सबसे सरल उपाय है। मेडिटेशन यानी ध्यान करना आपको शारीरिक और मानसिक रूप से तेजस्वी और उर्जावान बनाता है। अतः प्रतिदिन 10 से 20 मिनट के लिए ध्यान लगाकर आप जीवन के प्रति जागरूकता को बढ़ा सकते हैं। मेडिटेशन करने से आपकी सोच में उत्कृष्टता और सकारात्मकता आएगी


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  1. सकारात्मक गतिविधियों में शामिल हो


आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि केवल सकारात्मक सोच रखने से आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन नहीं हो सकता। यदि आप केवल सकारात्मक  चिंतन करके अच्छे परिणाम की आशा करते हैं तो यह आपकी भूल होगी। जैसे- एक छात्र यदि इस सकरात्मक सोच के साथ परीक्षा देता है कि मुझे इस परीक्षा को क्लियर करना है लेकिन अगर उसने ठीक से पढ़ाई नहीं की है तो वह सफल नहीं हो सकता। इसलिए आपको सकारात्मक सोच के साथ साथ  रचनात्मक और सकारात्मक कार्यों में भी संलग्न रहना होगा।


  1. जीवन को जिंदादिली से जीएं

 

सकारात्मक सोच वाले लोगों में एक बात सबसे काॅमन होती है कि वे जिंदादिल और हंसमुख स्वभाव के होते हैं। वे अभावों का रोना नहीं रोते बल्कि जो है उसका आनंद लेते हैं। वे जीवन को घुट-घुटकर नहीं, खुलकर जीते हैं।  इसलिए अगर आप जीवन को शानदार बनाना चाहते हैं तो अपने विचारों में खुलापन लाएं। हंसे तो खुलकर हंसे, रोने का दिल करें तो खुलकर रोएं और खुले दिल से सबकी मदद करें। याद रखें दुसरों की मदद करके जो खुशी मिलती है वहीं वास्तविक खुशी होती है।


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  1. नाकामियों से सीखना शुरू करें


हर कामयाब व्यक्ति की कामयाबी के पीछे हजारों नाकामियां छुपी होती है परंतु लोगों को उसकी कामयाबी ही दिखाई देती है। जबकि सच तो यह होता कि उसकी कामयाबी उसकी नाकामियों से सीखें हुए अनुभवों का निचोड़ होता है। इसलिए अपनी नाकामियों से सीखना शुरू करें। अपने जीवन को क्रिकेट मैच समझें और अपने दिन को ओभर। अगर एक दो ओभर मेडेन भी निकलते हैं तो चिंता मत करें। बस अपने हुनर पर विश्वास रखें और क्रिज पर टिकें रहें कभी ना कभी सिक्स वाली गेंद जरूर आएगी।


 10. ईश्वर पर विश्वास रखें

हम सब इंसान उस ईश्वर की संतान हैं और एक पिता कभी नहीं चाहता कि उसके बच्चे दुःखी और परेशान रहें। इसलिए अगर आपके साथ कुछ ग़लत हो जाएं ईश्वर पर विश्वास रखें कि वह जो करता है हमारे भले के लिए ही करता है। आप बस अपना कर्तव्य-कर्म करते रहें और सब-कुछ ईश्वर पर छोड़ दें। वह आपको कभी निराश नहीं होने देगा। हां एक बात हमेशा याद रखें कि आप जैसे कर्मबीज बोते हैं आपको वैसे ही फल प्राप्त होते हैं।


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तो दोस्तों आशा करता हूं कि आप इन उपायों को अपनाकर अपने अंदर सकारात्मक सोचने की कला को विकसित कर सकते हैं और एक बार अगर आपने इस कला को सीख लिया तो आप हमेशा हर परिस्थिति में सकारात्मक नजरिए से सोच पाएंगे।


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