एक गरीब लड़के की दिल को छू लेने वाली दर्द भरी सच्ची प्रेम कहानी 💔part-4

सच्चे प्यार की एक दर्द भरी प्रेम कहानी|heart touching love story in hindi

Heart touching true love story, sad love story in hindi
      Love story in hindi

अभी तक आपने पढ़ा👇
 
दीपक अपनी बहन की शादी के अगले दिन उसके ससुराल जाता है जहां एक लड़की उसे एक love latter देती हैं जो किसी अनजान लड़की द्वारा भेजा गया होता है। दीपक उस लव लेटर को खोलकर पढ़ता है। तो पता चलता है कि उसकी कोई रिया नाम की लड़की उसे बिना देखे बिना जाने पिछले एक साल से प्यार करती है। दीपक उस लड़की से कहता है कि वह उसके प्यार को कुबूल नहीं कर सकता। लेकिन वह लड़की कहती हैं कि मैं आपको अपना पति मान चुकी हूं और अगर आप मेरे प्यार को स्वीकार नहीं करेंगे तो मैं जहर खाकर आत्महत्या कर लूंगी। आखिरकार दीपक उसके प्यार को स्वीकार कर लेता है और धीरे-धीर
 उसे भी उस लड़की से बेइंतहा मोहब्बत हो जाती है। धीरे धीरेेेे प्यार का सिलसिला शुरू होता है। वे दोनों दुनिया की नजरों से छिपकर एकांत में मिलने लगते हैं और साथ जीने मरने की कसमें खाते हैं। गरीब परिवार का दीपक उस लड़की को दुनिया की सारी खुशियां देना चाहता है इसीलिए वह अपने पैरों पर खड़े होने के लिए विदेश कमाने चला जाता है। इधर रिया के परिवार को उनके प्यार के बारे में पता चल जाता है और वे लोग नाराज गुस्से में रिया को टार्चर करने लगते हैं। दीपक को जब इस बात का पता चलता है तो वह अपने पापा को रिया के घर रिश्ता लेकर भेजता है परंतु रिया के परिजन रिश्ते से इंकार कर देते हैं। फिर दीपक रिया से बात करने की कोशिश करता है लेकिन वह भी अपने परिजनों के दबाव में आकर टुट चुकी होती है और उससे रिश्ता तोड़ लेती हैं। बेवफ़ाई और नफ़रत की आग में जलता हुआ दीपक एक खतरनाक फैसला करता है ...

एक गरीब लड़के की दिल को छू लेने वाली प्रेम कहानी (भाग 1) 

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बेवफा कौन था| love story in hindi


हम अपनी मोहब्बत का इम्तिहान देंगे, तेरे घर के सामने हम अपनी जान देंगे। तेरे घर के सामने हम अपनी जान देंगे… दिलरूबा तू है बेबफा…


अजीब इंतेफाक था कि बस के सांउड सिस्टम में भी यहीं गाना प्ले हो रहा था। इधर उसने भी तय कर ही लिया था कि वह रिया के घर जाकर सल्फास की गोलियां खा लेगा। दीपक ने इस गाने को पहले भी कई बार सुना था लेकिन उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिंदगी इस गाने को इतनी गंभीरता से ले लेगी। बस की सीट पर सिर टिकाए उसने खिड़की से बाहर नजर घुमाई। हरे भरे पेड़-पौधे, खेत खलिहान सब तेजी से भागते जा रहे थे। उसे ऐसा लगा जैसे जिंदगी भी उसके हाथ से छूट कर तेजी से भागी जा रही है। आज का दिन शायद उसकी जिंदगी का आखिरी दिन होने वाला था। उसने गहरी सांस ली और पलकों को समेट लिया।



 मां, क्या तुम कभी हवाई जहाज में बैठी हो ? 14-15 साल के लड़के ने आसमान में उड़ते हुए एरोप्लेन पर नजरें गड़ाए हुए पुछा। ना बबुआ, "हवाई जहाज में बैठना हमारे नसीब में कहां"। चावल से कंकड़ चुगते हुए मां ने अपने नसीब को कोसा।  मां जब मैं बहुत बड़ा आदमी बन जाउंगा तो तुम्हें और पापा को हवाई जहाज में जरूर बैठाउंगा। उसने नजरों से ओझल होते ऐरोप्लेन से नजरें हटाने हुए मां की तरह देखा। ठीक है! "पहले तू बड़ा आदमी तो बन जा "। मां ने मुस्कुराते हुए कहा। दीपक ने एक पल के लिए आंखें खोली तो अंदर कुछ बिखरता सा महसूस हुआ। उसने घबरा कर आंखें मूंद ली। 



"जिस बेटे को पाल पोस कर बड़ा किया, पढ़ा-लिखा कर काबिल बनाया; जब उसी ने मेरे ऊपर हाथ उठा दिया तो अब बचा क्या है।" बाबुजी के आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे। तू चिंता मत कर! एक बेटा खराब निकल गया तो क्या हुआ तेरा दूसरा बेटा है ना; यह तेरा खेवनहार बनेगा। दादी ने अपने आंचल से बाबुजी के आंसू पोंछते हुए 10 साल के दीपक की ओर इशारा किया। बाबुजी ने बुझे-बुझे निगाहों से उसकी की तरफ देखा था; जैसे वो पुछ रहे हो कि कहीं तुम भी ऐसा ही तो नहीं करोगे। दीपक के बड़े भाई झगड़ालू स्वभाव के थे। वे कई सालों से अपने मां-बाप से अलग रहते हैं और अक्सर उनसे झगड़ते रहते थे। दीपक को ऐसा लगा जैसे- बाबुजी की उम्मीद भरी निगाहें उसे घूर रही है।



छोटे भाई का भविष्य, छोटी बहनों की उम्मीद सब कुछ बस उसी पर टिकी हुई थी। उसके मन में विचारों का ऐसा सैलाब उमड़ रहा था कि उसे बेचैनी सी होने लगी। तभी एक झटके से बस रूकी तो विचारों का तुफ़ान थम गया। बस अपने गंतव्य तक पहुंच चुकी थी। जब वह सीट से उठकर बाहर निकला तो उसे थोड़ी राहत महसूस हुई। बस स्टैंड के बाहर निकल कर वह आहिस्ता-आहिस्ता रिया के घर की तरफ बढ़ने लगा।


एक गरीब लड़की की दिल को छूने वाली दर्द भरी प्रेम कहानी (भाग 2)


तभी उसे मोबाइल की घंटी सुनाई पड़ी। उसने पाकेट में हाथ डाल कर मोबाइल निकाल लिया। वाह! क्या खूब रिश्तेदारी निभाई आपने। आपकी मेरे साथ क्या दुश्मनी थी जो आपने मेरे साथ ऐसा किया। रिया के जीजा का नंबर देखते ही दीपक बरस पड़। आपको जरूर कोई गलतफहमी हुई है,  मैं तो अपनी तरफ से उन्हें मनाने की भरसक कोशिश कर ही रहा हूं। उधर से आवाज आई। बस रहने दिजिए,अब आपको कुछ करने की जरूरत नहीं है। मैं खुद जा रहा हूं उनके घर उनसे बात करने। दीपक ने कहा। आप मेरी बात मानिए और अभी वहां मत जाइए, अभी आपका वहां जाना ठीक नहीं है। अब ठीक-बेठिक जो भी होगा देखा जायेगा; आज तो आखिर फैसला हो कर रहेगा। दीपक ने अपना फैसला सुनाया।

आप समझते क्यों नहीं, मैंने बहुत मुश्किल से उन्हें बात करने के लिए राजी किया है। यदि अभी आप वहां पर चले गए तो बनी-बनाई बात बिगड़ जाएगी। आप एक काम किजिए, अभी मेरे घर चले आइए; मैं आपको अपने साथ ले जाकर उनसे बात करवा दूंगा। रिया के जीजा जी ने समझाया। "अच्छा ठीक है"। दीपक ने फोन रख दिया।


रिया के जीजा का घर रिया के घर में करीब एक किलोमीटर के फासले पर था। दीपक रिया के जीजा जी के घर चला गया। वहां पर रिया के जीजा और दीदी दोनों मौजूद थे। उन्होंने दीपक का उचित आदर-सत्कार किया। थोड़ी देर के बातचीत के बाद दीपक ने रिया के मम्मी-पापा से मिलने की इच्छा जताई। आप थोड़ी देर आराम किजिए तब तक मैं उनसे इजाजत ले कर आता हूं। रिया के जीजा ने कहा और बाहर चले गए।


थोड़ी देर बाद जब वे आए तो उनका चेहरा लटका हुआ था। दीपक ने पूछा, क्या हुआ, क्या कहा उनलोगों ने। वे लोग अभी ना तो आपसे मिलना चाहते हैं और ना ही बात करना चाहते हैं। रिया के जीजा जी ने बताया। कोई बात नहीं अब मैं खुद उनसे बात करता हूं। वह कहते हुए गुस्से में बाहर निकल गया। वह तेज कदमों से रिया के घर की तरफ बढ़ता जा रहा था तभी उसे रिया की छोटी बहन नेहा का स्कुल नजर आया। जिसके बारे में एक बार बताया था कि वह उसी स्कुल में पढ़ती है। दीपक को नेहा से बड़ा लगाव था। वह उसे छोटी बहन की तरह प्यारी थी। उसे लगा कि  उसे नेहा से एक बार जरूर बात करनी चाहिए। उसे विश्वास था कि वह उससे झुठ कभी नहीं बोलेगी। 

एक गरीब लड़के की दिल को छू लेने वाले दर्द भरी प्रेम कहानी (भाग 3)


स्कूल के गेट पर खड़े होकर उसने अंदर देखा तो एक शिक्षक बच्चों को पढ़ाते नजर आए। दीपक ने उन्हें इशारे से अपने पास बुलाया। क्या रिया स्कूल आई है। शिक्षक को नमस्कार करने के बाद दीपक ने उनसे पुछा। हां आई तो है लेकिन आप उसके कौन है। उस शिक्षक ने सवालिया लहजे से पूछा। नेहा मेरी बहन है, क्या आप उसे बुला सकते हैं। "नेहा बाहर आओ, कोई आया है तुमसे मिलने। उस शिक्षक ने वहीं से आवाज लगाई। थोड़ी ही देर में एक दुबली पतली सी लड़की बाहर आई। प्रणाम भैया! उसने आते ही दीपक के पैर छुए तो शिक्षक अंदर चला गया। उसके बुझी आंखें, बेतरतीब बाल, सुखे होंठ और उदास चेहरा देखकर दीपक का दिल दुख से भर गया। उसे विश्वास ही नहीं हुआ कि ये वही खुबसूरत लड़की है, जो हमेशा खुशी से चहकती रहती थी।




घर का क्या हाल-चाल है नेहा, कुछ बताओं ना। उसकी आवाज में दर्द था। "क्या बताऊं भैया" घर के हालात बहुत ख़राब है। घर में तुफ़ान मचा हुआ है, कई दिनों से चुल्हा तक नहीं जला है। मम्मी-पापा दीदी को तो टार्चर कर ही रहे हैैं, साथ में मुझे और आपकी बहन को भी टार्चर कर रहे हैं। क्या उन्होंने तुम्हें भी मारा है। हां वे लोग कह रहे हैं कि जब तुम्हें इस बात की खबर थी तो हमें बताया क्यों नहीं। उसकी हालत देखकर दीपक को पहली बार खुद से नफ़रत हुईं। मेरी वजह से इस मासुम लड़की को इतने दुःख सहने पड़े। यह सोच कर वह अंदर ही अंदर टुटने लगा। "घर चलिए ना भैया" दीपक को चुप देख कर नेहा ने कहा। "आज नहीं फिर कभी, तुम एक काम करोगी मेरा, ये पत्र अपनी दीदी तक पहुंचा देना"। दीपक ने अपना आखिरी पत्र जेब से निकाल कर नेहा को दे दिया। जो उसने कल रात ही लिखा था। "ठीक है, अब मैं जाऊं" नेहा ने सिर हिलाते हुए पुछा। "हां अब तुम जाओ" दीपक ने कहा। नेहा ने उसके पैर छुए और अंदर चली गई। उसके जाते ही वह भी आगे बढ़ गया।



पता नहीं क्यों नेहा से मिलने के बाद उसके ख्यालात बदलने लगे थे। अब उसे अपनी खुशी की नहीं बल्कि नेहा के परिवार की फ़िक्र होने लगी। अगर मैं आज मैंने नेहा के घर जाकर जहर खा लिया तो नेहा के परिवार पर मुसीबत आ जाएगी। मेरे मौत के बाद पुलिस उन्हें परेशान कर के रख देंगी। एक तो वे बेचारे अपने नालायक बेटों की वजह से पहले से ही परेशान हैं। उनके वजह मम्मी जी पहले से ही डिप्रेशन की शिकार हैं। मुसीबत का सामना करते करते पापा जी चिड़चिड़े स्वभाव के हो गए हैं। और यदि वे अपनी बेटी की शादी मेरे साथ नहीं करना चाहते तो इससे ये तो साबित नहीं ना होता कि वे लोग बुरे हैं। वे क्या कोई भी मां बाप यहीं चाहते हैं कि उनकी बेटी की शादी अमीर परिवार में हो ताकि वह हमेशा सुखी रहे। यदि मैं भी उनकी जगह होता तो शायद यहीं करता। फिर मेरे जैसे गरीब आदमी की औकात ही क्या है। यदि रिया की शादी मुझसे हो भी गई तो मैं उसे वो खुशियां कभी नहीं दे पाऊंगा जिसकी वो हकदार हैं। मेरे साथ रहकर उसकी जिंदगी भी अजाब बन जायेगी।



आज अगर उनके दरवाजे पर मेरी मौत हो गई तो मेरे घर वाले इनके ऊपर हत्या का केस कर देंगे। फिर मम्मी पापा को, रिया को, नेहा को, सबको पुलिस पकड़ कर ले जाएंगी। मेरी बहन अंकिता का बसा-बसाया घर उजड़ जायेगा। रिया की बड़ी बदनामी होगी और रिया अपनी बदनामी बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी। हो सकता है कि बदनामी के डर से वह आत्महत्या भी कर ले। और इन सब का जिम्मेदार सिर्फ मैं होऊंगा। क्या मैं इतना खुदगर्ज हूं कि अपनी खुशी के लिए इतने लोगों के दुख का कारण बनूं। मैं तो हमेशा से ही दुसरो की खुशी के लिए अपनी खुशियों को कुर्बान करता आया हूं। क्या मैं इनकी खुशी के लिए एक और कुर्बानी नहीं दे सकता। क्या किसी को पा लेना ही सच्ची मुहब्बत है।


(सच्चे प्यार की एक अधूरी कहानी)


इसी तरह के हजारों विचार फिर से उसके दिमाग में तूफान उठाने लगे। उसका सिर फटने लगा, पांव भारी होने लगें। उसके कानों में एक साथ कई लोगों के चीखने चिल्लाने की आवाज गूंजने लगी; उसकी आंखों के सामने कभी रिया का रोता हुआ चेहरा सामने आ जाता तो कभी नेहा का रोता हुआ मासुम चेहरा घूम जाता। कभी अंकिता का रोता-चीखता चेहरा सामने नजर आने लगता। अब एक कदम भी चलना उसके लिए मुश्किल हो गया। वह सिर पकड़ कर एक पेड़ के नीचे बैठ गया। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे और क्या ना करे।


कुछ देर तक वह उसी हालत में बैठा रहा। क्या तू इतना कायर और कमजोर है कि मुर्खो की भांति आत्महत्या करने चला है। क्या तुझे अपने प्यार पर इतना भरोसा नहीं है कि तू उसे जलिल करना चाहता है। क्या किसी के जिस्म को हासिल कर लेना ही मुहब्बत है। क्या बिना शादी किए तू अपने प्यार को जिंदा नहीं रख सकता। क्या तेरे जीवन का मकसद यहीं है। क्या तू भुल गया कि तुम्हारा जन्म इंसानियत को जिंदा रखने के लिए हुआ है। क्या तू अपने मां-बाप, भाई-बहनों को जीते-जी मार देना चाहता है। इसी तरह के हजारों सवाल उसके मन में उठने लगे।


तभी उसकी अंतरात्मा से एक आवाज आई, "नहीं दीपक नहीं" तू ऐसा नहीं कर सकता, तू ऐसा नहीं है। तुम्हें इन सबकी खुशियों के बदले अपने खुशियों की कुर्बानी देनी ही होगी।" नहीं! एकाएक उसने सिर को झटका दिया और उठ खड़ा हुआ। अब वह अंतिम निर्णय पर पहुंच चुका था। उसने जेब से सल्फास की गोलियां निकाली और नफ़रत से देखते हुए उसे दूर फेंक दिया। सच्ची मोहब्बत जीवन लेती नहीं है, जीवन देती है। बहुत पहले उसने किसी मैगजीन में यह नज्म पढ़ी थी लेकिन उसका अर्थ उसे आज समझ आया था। 

तुम ना हुए मेरे तो क्या….

मैं तुम्हारा, मैं तुम्हारा, मैं तुम्हारा रहा,

मेरी चंदा मैं तेरा सितारा रहा..

रिश्ता है बस एक रेत एक रेत सा,

ऐ समंदर मैं तेरा किनारा रहा।


धड़ाम …

आह! बिस्तर से नीचे गिरते ही उसके यादों और ख्वाबों के बीच का डोर टुट गया। "क्या यार फिर से मुहब्बत के दौरे पड़ने लगे क्या, जो सपनो में बुदबुदा रहे थे।" तवे पर ‌रोटी रखते हुए प्रदीप ने चुटकी ली। सबसे पहले तो तुम ये बताओ कि मुझे बिस्तर से गिराया किसने? दीपक कमर सहलाते हुए गुस्से में बोला। प्रदीप ने नजरों घुमाते हुए दरवाजे की तरफ इशारा किया; जहां बिशेसर मुस्कुराते हुए भागने की तैयारी में चप्पल पहन रहा था। "रूक जा साले, आज छोड़ूंगा नहीं"। दीपक भी हंसते हुए तेजी से उसके पीछे भागा। तो कमरे में मौजूद सभी लोग ठहाके लगाने लगे।

दोस्तों इस कहानी को लिखने का मेरा उद्देश्य बस इतना है कि आजकल के युवक प्यार का सही अर्थ समझ पाएं और गलत रास्ते चुनने से बच जाएं क्योंकि आजकल अक्सर देखा जाता है कि लोग प्यार में हत्या-आत्महत्या जैसे गलत कदम उठा लेते हैं। लेकिन ये गलत है और ऐसा नहीं होना चाहिए। क्योंकि जहां तक मेरा मानना है कि किसी को हासिल कर लेना मोहब्बत नहीं है बल्कि किसी को खोकर उसे जीवन भर दिल में जिंदा रखना ही सच्ची मोहब्बत है।

और हां ये कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। अभी बहुत सारी बातें बाकी है। लेकिन अब मैं इसके आगे तभी लिखूंगा जब आप लोग चाहेंगे इसलिए कृपया नीचे कमेंट करके बताएं कि आप को ये कहानी कैसी लगी।


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सच्चे प्यार की एक अधूरी कहानी

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