अपनी जिंदगी के बड़े फैसले खुद करना सीखों वरना हमारी तरह जीवन भर पछताओगे

Motivational speech in hindi written|विद्यार्थियों के लिए मोटिवेशनल स्पीच

Motivational speech in hindi, how to take right decisions
     Motivational speech

दोस्तों आज हम आपकों जीवन के ऐसे कड़वे सच से रूबरू कराने जा रहे हैं। जिसकी वजह से दुनिया के 72% लोगों का जीवन एक बोझ बन कर रह गया है। उनकी हालत ऐसी हो चुकी है कि वे ना तो हंस रहे है और ना रो रहे है। बस किसी प्रकार घुट-घुटकर कर जी रहे हैं और वह भी इसलिए जी रहे हैं क्योंकि उनके साथ और भी कई लोगों की जिंदगीयां जुड़ी हुई है। वरना अब तक वे sucide कर चुके होते। परंतु हम नहीं चाहते कि जो इनके साथ हुआ वह आपके साथ भी हो इसलिए आज हम आपको ऐसी सच्चाई बताना चाहते हैं जिसे पढ़कर आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे।

 


एक सर्वे के अनुसार दुनिया के 72% लोग अपनी नौकरी से खुश नहीं है। इस सर्वे में पाया गया कि आमतौर पर लोग 35 साल की उम्र आते आते अपनी नौकरी से नफरत करने लगते हैं। लेकिन इस आर्टिकल में हम केवल इस सर्वे के आधार पर बात नहीं कर रहे हैं। बल्कि हमने खुद इस बात को अनुभव किया है। इसके अलावा हमने इस सवाल को सैकड़ों लोगों से पूछा है कि "क्या आपने जांब से खुश हैं" मगर हमें आज तक कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जो कहे कि वह अपनी जाॅब से संतुष्ट हैं। लेकिन फिर भी वे उस जाॅब को कर रहे हैं क्योंकि उस जाॅब के लिए उन्हें सैलरी मिलती है। जिससे उनकी और उनके परिवार की जरूरते पुरी होती है। वे उस जाॅब को छोड़ना तो चाहते हैं मगर चाहकर भी वे उसे छोड़ नहीं सकते क्योंकि उस जाॅब को करना उनकी मजबूरी है। और हमें लगता है कि यहीं वजह है कि अधिकांश लोग अपने जीवन में डिप्रेशन का सामना कर रहे हैं। हमने जब इस विषय पर स्टडी शूरू की तो काफी हैरान कर देने वाली बाते सामने आई। और यही बातें हम आपको बताने वाले है।

दोस्तों आजकल हमारा एजुकेशन सिस्टम ही नौकरी का गुलाम बन गया है। हमारे parents हमें पढ़ाते ही इसलिए हैं ताकिं हम पढ़-लिखकर कोई अच्छी नौकरी पा सकें।
हमारे parents हमारे स्कूलींग टाईम से ही हमारे ऊपर अपनी इच्छाएं का बोझ लाद देते हैं। दादाजी कहते हैं, हमारा पोता बड़ा होकर डाक्टर बनेगा, मां कहती हैं,कि हमारा बेटा इंजिनियर बनेगा। पापा कहते हैं कि नहीं नहीं, मैं तो अपने बेटे को आई पी एस अफसर बनाऊंगा। 
लेकिन हम उनसे बस एक बात कहना चाहते हैं कि उन्हें कम से कम एक बार हमसे भी तो पूछना चाहिए कि हम क्या बनना चाहते हैं। हमारे सपने क्या है। लेकिन नहीं उन्हें तो हमारे सपनों से कोई मतलब ही नहीं होता। वे तो बस हमें पैसे कमाने की मशीन बना देना चाहते हैं।



उनकी उम्मीदों को पूरा करते करते हम इतने depressed हो जाते है कि अपने सपनों पर अपने अपने passion पर काम ही नहीं कर पाते। फिर उसके बाद हमारी शादी हो जाती है और फिर बीबी और बच्चों की फरमाइश पूरी करते करते, हम भूल ही जाते है कि हमारी अपनी भी कोई जिंदगी थी। हमारे भी कुछ सपने थे। बस फिर उसके बाद जिंदगी की race में भागते-भागते हम कब depression और anxiety के शिकार हो जाते हैं हमें पता ही नहीं चलता। इस तरह हमारी सारी जिंदगी दूसरों की उम्मीदों पर खरा उतरने में गुजर जाती है।

My life real story


हमारे स्कुली टाईम में हमारे साथ भी ऐसा ही हुआ था हम अपने जीवन में कुछ बड़ा करना चाहते हैं। या सच कहूं तो हम बचपन से ही क्रिकेटर बनना चाहते थे। चलते फिरते,सोते जागते हम बस क्रिकेट के बारे में ही सोचते रहते थे। क्रिकेट हमारा सपना, हमारा जूनून सब कुछ था। और अपने सपने के लिए हम कड़ी मेहनत भी करते थे। लेकिन हमारे पैरेंट्स ने जबरदस्ती हमें एक ऐसे जाॅब में लगा दिया जो हमें बिलकुल पसंद नहीं था। हमने लाख समझाने की कोशिश की लेकिन किसी ने हमारी एक ना सुनी। और फिर भी पैरेंट्स के दबाव की वजह से हमें उस जाॅब को करना पड़ा। परंतु उस काम में हमारा दिल बिल्कुल ही नहीं लगता था। ऐसा लगता था जैसे समंदर की मछली को किसी ने एक छोटे से तालाब में क़ैद कर दिया हो। फिर भी हमने उस जाॅब के अनुसार ढलने की काफी कोशिश की लेकिन पता नहीं क्यों हम अंदर ही अंदर घुटते रहते थे कोई खुशी ही नहीं मिलती थी उस काम में। 


और आखिरकार 3 सालों तक समय बर्बाद करने के बाद हमने उस जाॅब को छोड़ दिया। उसके बाद कुछ दोस्तों और रिश्तेदारों की सलाह पर हमने एक दुसरी जगह जाॅब कर ली। परंतु वहां भी हमें सुकून नहीं मिला। हमारा पैशन, हमारे सपने हमे अंदर ही अंदर कुरेदते रहते। फिर एक दिन हमे एहसास हुआ कि हम नौकरी के लिए बने ही नहीं है। हमारा जन्म तो किसी और उद्देश्य के लिए हुआ है। और एक दिन हमे ख्याल आया कि इस जाब को छोड़ कर अपने पैशन को फोलो करना चाहिए। लेकिन इस बार हमने इस जाॅब को नहीं छोड़ा है। और हम चाहेे तो इस जाॅब को छोड़ नहीं सकते। क्योंकि हमारी पुरी फैमिली हमारे ऊपर ही depend है। परंतु आज हम अपने जाॅब के साथ साथ अपने पैशन पर, अपने सपनों पर भी काम कर रहे हैं। और इस काम में हमें जो खुशी मिलती है जो satisfaction मिलता है वह हमे किसी जाॅब में नहीं मिल सकती।



इसलिए आज हम आपसे कहना चाहते है कि आप अपने जीवन का फैसला अपने parents के ऊपर मत छोड़ना। क्योंकि आपके parents आपके लिए वही रास्ता चूनेगे जो उन्होंने अपने जीवन-काल में देखा है या अनुभव किया है। वे अपने जीवन के अनुभवों के आधार पर ये चाहेंगे हैं कि उनके जीवन में जो कमी थी, जो दुख था वह आपके जीवन में ना आएं लेकिन ये कोई जरुरी नहीं कि कि जो कहानी उनके जीवन काल में घटी हो। वहीं कहानी आपके साथ भी हो। इसका एक उदाहरण देता हूं, पहले हमारे बड़े बुजुर्ग एक कहावत कहते हैं कि पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब, और खेलोगे कूदोगे बनोगे खराब। अब आप खुद देख लीजिए कि यह कहावत कितनी गलत साबित हो गई है। इसलिए आपके पैरेंट्स चाहे कुछ भी कहें उन्हें कहने देना, उनका काम है आपको सलाह देना। हालांकि वे अपनी समझ से आपके भले के लिए ही कोई बात कहते हैं लेकिन ये कोई जरुरी नहीं है कि उनकी हर बात सही हो हमने अपने लाईफ में ऐसे बहुत से लोगों को देखा है जो अपने पैरेंट्स के बताए मार्ग का अनुसरण करके गुमनामी में खो गए।

अब आप यह मत सोचना कि हम आपको आपके parents के खिलाफ भड़का रहे हैं हम जानते हैं कि हमारे पैरेंट्स को हमारे future की चिंता रहती हैं। इसलिए वे चाहते हैं तो हम financially रूप से Secure हो जाएं और ये security उन्हें जाॅब में दिखाई देती है। बेशक वे हमारे लिए हमेशा सही फैसला करते हैं लेकिन ये कोई जरुरी नहीं है कि‌ हर बार उनका फैसला सही ही हो। इसलिए आप अपना रास्ता खुद तय करें।

और वैसे भी जीवन के दो नियम होते हैं। पहला दुसरो के बनाये हुए रास्ते पर चलना और दूसरा अपना रास्ता खुद बनाना। ज्यादातर लोग दूसरे के बनाए हुए रास्ते पर चलना पसंद करते हैं लेकिन मैं कहता हूं कि आप हमेशा अपने बनाए हुए रास्ते पर चलना। क्योंकि दूसरे के बनाए हुए रास्ते पर चलकर आपको वही मिलेगा जो सबको मिलता है लेकिन अपने बनाए हुए रास्ते पर चलकर आपको मिलेगा जो आप चाहते हैं। हां हो सकता है कि इसके लिए आपके मां-बाप थोड़े दिनों के लिए आपसे नाराज़ हो जाएं लेकिन मां-बाप तो मां-बाप ही होते हैं वे कभी भी ज्यादा दिनों तक आपसे नाराज़ नहीं रह सकते। जैसे ही आप अपने काम में सफल होने लगेंगे वे आपको फिर से सर आंखों पर बैठा लेंगे।

हां अगर आपके parents की financial condition ऐसी नहीं है कि वे आपके सपनों को सपोर्ट कर सकें तो आपको उनकी मजबूरी को समझते हुए कोई जाॅब कर लेनी चाहिए लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आप अपने सपनों से compromise कर लेनी चाहिए। यदि सच में आपके अंदर कोई passion है तो आपको उसे मरने नहीं देना चाहिए।आपको जांब के साथ साथ उसे भी improve करते रहना चाहिए। ताकि आप आगे चलकर अपने पैशन को अपने प्रोफेशन में तब्दील कर सकें क्योंकि यही एक चीज है जो आपको आपको सपने की तरफ ले जाएंगी लेकिन अगर ये मर गया तो आपकी जिंदगी एक बोझ बन कर रह जाएगी। क्योंकि किसी सपने के टूटने के बाद उतना ही दर्द होता है जितना एक दिल के टुटने के बाद होता है और इस दर्द को हमसे बेहतर और कौन समझ सकता है।

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और हां आखिर में हम सभी parents से हाथ जोड़कर यहीं request करना चाहते हैं कि कृपया अपने बच्चों पर अपनी इच्छाओं का बोझ ना लादे। क्योंकि जिंदगी उसकी है और उसे अपनी जिंदगी का फैसला खुद करने दें। क्या पता आपके बच्चे में एक और सचिन तेंदुलकर छुपा हुआ हो, आपके बच्चे में एक और मिल्खा सिंह छुपा हो या आपके बच्चे में एक और अमिताभ बच्चन छुपा हुआ है। आप नहीं जानते कि आपके बच्चे में कितनी संभावनाएं छिपी हुई है। इसलिए आप कृपया उसे बाहर निकलने दे क्योंकि यदि वो बाहर नहीं निकल पाया तो जीवन भर अंदर ही अंदर घुटता रहेगा।

आपने हमारे विचारों को इतने ध्यान से पढ़ा, उसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद🙏




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