जानिए असली खुशी पाने का गुप्त रहस्य | the secret of real happiness

असली खुशी कैसे मिलेगी|the secret of real happiness

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दोस्तों इस आर्टिकल में हम आपको सच्ची खुशी का रहस्य बताने वाले हैं। जो आपको जीवन की असली खुशीयों तक लेकर जाएगी। इसलिए यदि आप जानना चाहते हैं कि असली खुशी‌ क्या है और असली खुशी कैसे मिलेगी तो इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़ें।

असली खुशी क्या है ?

मैंने सुना है कि इस दुनिया में खुशियों की बहुत कमी है। इतनी खूबसूरत है, ये दुनिया, इतने अच्छे लोग हैं यहां। फिर भी लोग यहां खुशीयों के लिए तरस रहे हैं। जानते हैं क्यों। दरअसल आजकल लोगों ने खुशीयों की परिभाषा ही बदल दी है। लोग सोचते हैं कि हमें असली खुशी तब मिलेगी जब आलीशान मकान बनवा लेंगे। असली खुशी तो मिलेगी जब हमें एक खूबसूरत स्त्री मिल जाएगी। असली ख़ुशी तब मिलेगी जब नई कार खरीद लेंगे। हमें असली खुशी तब मिलेगी जब हमारे पास ढेर सारा पैसा होगा। लेकिन आपको बता दें यह सारी खुशियां असली खुशी नहीं है। सारी खुशियां क्षणभंगुर है जो कुछ वक्त केे बाद स्वत: दुख में बदल जाएगी। आप खुद अपने आसपास देखिए कि इनमें से कितने लोग खुश हैं। आप देखेंगे कि साईकिल वाला बाईक वाले से अपनी तुलना करके दुखी हैं। जिसके पास बाइक है वह कार वाले को देख कर दुखी है। जिसके पास कार है, वह किसी और ही वजह से दुखी हैं। कोई स्त्री के साथ ना होने से दुखी है तो कोई स्त्री के साथ होने से दुखी है। इसी तरह से दुखों की यह कड़ी और लंम्बी होती जाती है। फ़िर लोग पुछते है कि असली खुशी कैसे प्राप्त हो। हमे सच्ची खुशी कैसे मिलेगी। 

असली खुशी कैसे मिलेगी

देखिए यह प्रश्न आज से नहीं सदियों से उठता रहा है। सदियों से लोग सच्ची खुशी की तलाश में भटक रहे हैं। इसके लिए लोग रात दिन मेहनत करते हैं, पूजा-पाठ भी करते हैं। और ना जाने और क्या-क्या जतन करते हैं। इसके बावजूद भी बहुत ही कम लोग होते हैं जिनकी तलाश पूरी हो पाती है। जानते हैं क्यों? क्योंकि यहां सब लोग केवल पाने में लगे हुए है। यहां कोई भी देना नहीं चाहता। लोग सम्मान तो पाना चाहते हैं। लेकिन सम्मान देना नहीं चाहते। लोग खुशी तो पाना चाहते है। लेकिन औरों को खुशी नहीं देना नहीं चाहते। लोग मोक्ष तो पाना चाहते हैं परन्तु लोभ और मोह को छोड़ना नहीं चाहते।
अब आप खुद सोचिए कि जहां हर कोई मांगने वाला होगा। वहां किसी को मिलेगा कैसे? आखिर कोई देगा तभी ना किसी को मिलेगा। अनूरुपता के नियम (Law of Correspondence) के अनुसार आप दुनिया को जो देते हैं, वहीं चीज आपके पास लौट जाती है। परंतु दुर्भाग्यवश सभी लोग इस बात से अंजान होकर याचक बने हुए हैं। जिसके पास कुछ नहीं है वह तो याचक है ही। जिसके पास सबकुछ भरा हुआ है वह भी याचक है। जो कभी दूसरों से तो कभी ईश्वर से खुशियों के लिए याचना करता रहता है।


जबकि संसार का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि खुशीयों का असली खजाना तो आपके भीतर ही मौजूद है। लेकिन लोग उस खजाने को खोल नहीं रहे हैं। और इस खजाने को पाने का नियम है यह है कि जब तक आप इसे दूसरों के लिए नहीं खोलोगे तब तक आपको इसमें से एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिलेगी। इसलिए अगर आप असली खुशी को पाना चाहते हो तो अपने भीतर के खजाने को खोलिए और उसे सारी दुनिया पर न्यौछावर कर दिजिए। अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठिए और जहां तक बन सके सबकी मदद किजिए। जिसको सम्मान चाहिए उसे सम्मान दिजिए। जो भूखा है, उसे भोजन दिजिए। जिसको प्यार की जरूरत है, उसके साथ प्यार बांटिए। किसी को खुशियां दे सकते हैं तो उसके साथ खुशियां बांटिए। यदि और कुछ नहीं है आपके पास, तो लोगों के साथ अपनी मुस्कुराहट बांटिए। अपने बेशुमार खजाने का द्वार सबके लिए खोल दिजिए। मैं गारंटी देता हूं कि आपको इतनी खुशी मिलेगी इतनी खुशी मिलेगी कि आप संभाल नहीं पायेंगे। क्योंकि असली खुशी पाने का हकदार वहीं होता है जो अपनी खुशी के लिए नहीं दुसरो की खुशी के लिए जीता है। 

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