अतीत की बूरी यादों को भूलना चाहते हैं तो अपनाएं ये 4 जादुई ट्रिक्स

how to forget past old memories, atit ki buri yadon se bahar Kaise nikale

how to forget past old memories,

यार उसने मेरे साथ ये ठीक नहीं किया?
मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ?
काश कि ऐसा हो गया होता तो आज मैं?
अगर मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ होता तो आज मैं?

 

बुरी यादों से बाहर कैसे निकलें


दोस्तों हमारे जीवन में तीन काल होते हैं। भूतकाल अर्थात गुजरा हुआ कल, भविष्य काल अर्थात आने वाला कल और वर्तमान काल। जिसमें अभी आप यह विडियो देख रहे है। लेकिन वर्तमान काल बहुत ही छोटा होता है, जो काफी तेज़ी से गुज़रता जाता है। आने वाला पल कब गुजरा हुआ पल बन जाता है पता ही नहीं चलता। शायद इसलिए दुनिया में केवल 1% लोग ही वर्तमान पर फोकस कर पाते है। हालांकि वर्तमान में हमारे पास दो विकल्प और होते हैं। हम या तो गुज़रे हुए कल के बारे में सोच कर परेशान हो सकते हैं, जिसे हम चाह कर भी बदल नहीं सकते, या फिर आने वाले कल की तैयारी कर सकते हैं। जो कि हमारा भविष्य है।  (वर्तमान में जीना सीखें)

लेकिन हममें से अधिकतर लोग अपनी भावनात्मक ऊर्जा और समय का अधिकांश भाग गुज़रे हुए वक़्त की घटनाओं या किसी की बातों को लेकर दुःखी और नाराज़ होने में ही बर्बाद कर देते हैं। जिसके परिणामस्वरूप उनका कीमती वक्त तो बर्बाद होता ही है। उसके साथ-साथ उनकी मानसिक शांति और सुकून भरी चला जाता है। कुछ लोग तो अपने अतीत में इस कदर उलझ जाते हैं कि वे ना तो वर्तमान की खुशियों का आनंद लें पाते हैं और ना ही वे भविष्य की संभावनाओं को देख पाते हैं। जिसका परिणाम यह होता हैं कि उनका जीवन बोझ बन कर रह जाता हैं। वे जीवन में आगे बढ़ ही नहीं पाते। इसलिए इस आर्टिकल हम आपको कुछ ऐसी जादुई तरकीब बताने वाले हैं। जिनको अपनाकर आप गुजरे हुए कल की बुरी यादों और कड़वे अनुभवों से छुटकारा पा सकते हैं। तो अगर आप अपने अतीत से जुड़े नकारात्मक विचारों से बाहर निकल कर सुनहरे भविष्य की ओर कदम बढ़ाना चाहते हैं। अगर आप एक तनावमुक्त, खुशहाल और सुकून भरी जिंदगी जीना चाहते हैं। तो यह article आपके लिए ही है।

 अतीत की बुरी यादों को कैसे भुलाएं


 अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि हममें से अधिकांश लोग अपने गुज़रे हुए कल की किसी अप्रिय घटना, किसी के द्वारा कहे गए शब्द, किसी के द्वारा किए गए गलत व्यवहार या धोखे को लेकर हमेशा नाराज या निराश रहते हैं। वे हमारे मां-बाप भाई-बहन, गर्लफ्रेंड ब्वॉयफ्रेंड, पति-पत्नी, दोस्त रिश्तेदार, बॉस या कोई अपरिचित लोग भी हो सकते है। कई बार तो हम अपने द्वारा ही की गई किसी गलती या उठाए गए किसी कदम को लेकर दुखी या निराश रहते हैं। जो हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है।

हमे यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि हमारी ज़िंदगी कभी भी समस्याओं, परेशानियों और नाकामियों से अछूती नहीं रह सकती। यह हमारे जीवन की एक कुदरती विकास प्रक्रिया है। क्योंकि हम हम जिसे तजुर्बा कहते हैं वह इन्हीं चीजों से निकल कर आता है इसीलिए हमें इन सब चीजों से विचलित और परेशान ना होते हुए अपनी ज़िंदगी को आगे बढ़ाना होगा, क्योंकि जब तक हम ऐसा नहीं करेंगे, हम नकारात्मक विचारों के ग़ुलाम बने रहेंगे।

देखिए भगवान भी चाहते है कि हम प्रसन्न, स्वस्थ, संपन्न और ख़ुशहाल रहें। इसलिए उन्होंने हमें एक जादुई तोहफा दिया है, जिसका नाम है, "क्षमा।"
क्षमा यानी माफी । वैसे नाम तो बहुत छोटा है लेकिन इस छोटे से शब्द ऐसी जादुई शक्ति है। जो हमे सभी प्रकार की मानसिक उलझनों और नकारात्मक विचारों की कैद से आजाद कर सकती है। यही वजह है कि हमारे अधिकांश धर्मों में क्षमा को एक महान गुण बताया गया है। भगवान महावीर ने भी कहा है, "क्षमा वीरस्य भूषणम" अर्थात क्षमा वीरों का आभूषण है। इसलिए अगर आप अपने अतीत की अनचाही यादों और सभी प्रकार की उलझनों से आजाद होना चाहते हैं तो आपको चार प्रकार के लोगों को पूरी तरह से माफ करना होगा।

 माफ करना सीखें

देखिए हमारे मन में उन्हीं घटनाओं अथवा लोगों के प्रति क्रोध, नाराजगी, नफ़रत,या निराशा उत्पन्न होती है। जिन्होंने हमारी नजर में हमें किसी न किसी तरह से नुक़सान पहुँचाया हो।
हम ज़िंदगी में ऐसी हर परिस्थिति पर विचलित हो जाते हैं, जो हमारी सोच के मुताबिक़ उचित और न्यायसंगत नहीं है। जब कभी भी हम देखते हैं कि हमारे साथ धोखा, अन्याय अथवा अनुचित व्यवहार हुआ है तो हमारे कमज़ोर आत्मसम्मान को ठेस पहुँचती है‌ और हम ग़ुस्से और नफ़रत से भर जाते हैं। इसलिए अगर हमने ऐसे लोगों को माफ नहीं किया तो सारी जिंदगी हम ऐसे लोगों को कोस कोस का दुखी होते रहेंगे जो हमारी नज़र में किसी बात अथवा किसी अप्रिय घटना के लिए जिम्मेदार हैं। क्योंकि जब तक आप ऐसे लोगों को माफ नहीं करेंगे तब तक आप दुःख तनाव, बेचैनी, और नेगेटिविटी से भरे रहेंगे। और आपको यह बताने की जरूरत नहीं है की नेगेटिविटी, ग़ुस्सा, तनाव, बेचैनी, और निराशा कई प्रकार की शारीरिक‌ और बीमारीयों की जड़ है। इसलिए अगर आप हमेशा के लिए इन सभी तकलीफों से आजाद होना चाहते हैं तो हर उस व्यक्ति को माफ़ कर दें।

कुछ लोग दूसरों को केवल इसलिए माफ़ नहीं करते क्योंकि उन्हें लगता है कि माफ़ करके एक तरह से वे उस व्यक्ति के उस व्यवहार को मान्यता दे रहे हैं, जो उनके दुख अथवा नाराजगी का मुख्य कारण था। कुछ लोग इसे अपनी इज्जत पर ले लेते हैं वे सोचते हैं की यदि वे उन्हें माफ कर देंगे तो लोग उन्हें कायर और डरपोक समझेंगे।
लेकिन, चिंता मत कीजिए। आपको अपने को नुक़सान पहुँचाने वाले व्यक्ति के व्यवहार पर न तो ध्यान देने की ज़रूरत है और ना ही यह सोचने कि की लोग क्या सोचेंगे या क्या कहेंगे। आपको तो केवल उसको माफ़ करना है, ताकि आप अपनी ज़िंदगी की ओर दोबारा लौट सकें। इसका सामने वाले व्यक्ति से कोई भी वास्ता नहीं है। इसका वास्ता तो आपके अपने मानसिक संतुलन और मन की शांति से है। क्योंकि जब आप दूसरे व्यक्ति को लेकर नाराज़ होते हैं या जब भी उसके बारे में सोचते हैं तो एक तरह से अपनी भावनाओं का नियंत्रण उसके हाथों में दे देते हैं।‌ वह दूर बैठे-बैठे आपको दुखी अथवा बेचैन कर सकता है। पर जब आप दुखी और निराश हो रहे होते हैं। तब शायद वह व्यक्ति अपनी जिंदगी का आनंद ले रहा होता है। यानी एक तरह से आप उसके गुलाम हो जाते हैं। आप एक तरह से उसके विचारों के जेल में कैद होते है। और सच तो यह है कि जेल एक इंसान नहीं बना सकता। क़ैदी और जेलर दोनों को ही उसी जेल में रहना पड़ता है। जब आप उसे माफ करके आज़ाद कर देते हैं तो आप भी उसके विचारों के जेल से बाहर आ जाते हैं। (अतीत की कड़वी यादों को भूलना सीखे)

देखिए एक बात तो आपको माननी ही पड़ेगी कि गलती केवल एक तरफ से नहीं होती। निश्चित रूप से आपने भी कुछ ना कुछ ऐसी गलती की ही होगी। जिसने चलते यह परिस्थिति आई होगी। इसलिए आपको अपने हिस्से की ज़िम्मेदारी स्वीकारने ही पड़ेगी। किसी को माफ करने के लिए अपनी सोच में लचीलापन और सामने वाले के प्रति उदारता दिखानी होगी। आपको यह मानना ही होगा कि इसके लिए कुछ हद तक मैं भी ज़िम्मेदार हूँ। मुझे ऐसी स्थिति को या तो आने ही नहीं देना था या फिर इतना खिंचने नहीं देना था। मैंने जो किया वह नहीं करना चाहिए था। "मैं उसे पूरी तरह से माफ़ करके इस मामले को यहीं पर खत्म करता हूं । मैं उसे दिल से माफ करता हूं और ईश्वर से उसके बेहतर भविष्य के लिए दुआ करता हूं।" ऐसा कहते ही आप अपने अंदर बेहद सुकून और प्रसन्नता महसूस करेंगे। ग़ुस्से और असंतोष के भाव जैसे ही आपके दिमाग़ से दूर जाएँगे वहाँ सकारात्मक विचार घर करने लगेंगे। आपके पास अब ज़्यादा ऊर्जा और उत्साह होगा। आप ज़्यादा मज़बूत और आत्मविश्वास से भरा महसूस करेंगे। 

दुख और दर्द भरी यादों को भूलने के 4 जादुई उपाय

  • आपको सबसे पहले अपने माता-पिता को माफ करना है। आपको अपने लालन-पालन में उनके द्वारा की गई किसी भी ग़लती के लिए उनको माफ़ कर देना चाहिए। और आपको उनके प्रति कृतज्ञ होना चाहिए, कि उन्होंने आपको ज़िंदगी दी। वे ही आपको यहाँ इस दुनिया में लाएं। भले ही वे किसी कारण वश आपको आपके पसंद की जिंदगी ना दे पाए हो लेकिन जैसे ही है वे आपके लिए भगवान के सामान है। इसलिए आज के बाद उनके बारे में कभी भी शिकायत मत कीजिएगा। अन्यथा यदि वे आपके माफ़ करने से पहले ही मर गएं तो फिर यह एहसास आपको ज़िंदगी भर सताता रहेगा।

  • आपको ऐसे लोगों के दूसरे समूह को भी माफ़ कर देना चाहिए, जिनके साथ आपके नज़दीकी रिश्ते कारगर न हो सके हों। जैसे आपके बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड या पति-पत्नी के रिश्ते। देखिए विवाह अथवा प्रेम संबंधों के रिश्ते कई बार इतने गहरे और संवेदनशील होते हैं, टूटने के वर्षों बाद भी आप कई वर्षों तक उनसे नाराज रहते हैं। उन्हें माफ नहीं कर पाते। यदि आप ऐसे रिश्ते में रह चुके हैं तो आप समझ रहे होंगे कि यह एहसास कितना दर्दनाक होता है। लेकिन यदि आप इस डर से बाहर निकलना चाहते हैं तो गलती चाहे किसी की भी हो आपको उन्हें माफ करना ही होगा। यदि आप उनका सामना नहीं करना चाहते तो आप उन्हें पत्र लिखकर भी माफी मांग सकते हैं। और हां इस बात की चिंता मत कीजिए कि सामने वाले कि रिएक्शन क्या होगा। यह आपकी चिंता का विषय नहीं है। आपका उद्देश्य तो, ख़ुद को अंदर से आजाद करके मानसिक शांति और सूकून वापस पाने का है।

  •  तीसरे नंबर पर आपको बचे हुए उन सभी लोगों को माफ़ कर देना है, जिन्होंने किसी न किसी रूप में आपको नुक़सान पहुँचाया है। आपको नुक़सान पहुँचाने वाले लोगों जैसे- आपके बॉस, बिजनेस पार्टनर, दोस्त, रिश्तेदार सबको माफ़ कर दीजिए उसमें से हर एक के नाम और उसके तस्वीर को यह कहते हुए मिटा दीजिए, कि मुझे इस दुनिया में किसी से कोई शिकायत नहीं है। मैं आज सबको माफ करता हूं।

अपने अतीत के लिए खुद को कैसे माफ करें

  • चौथे और अंतिम नंबर पर आपको खुद को माफ करना है। अपने द्वारा की गई किसी भी गलती या बेवकूफी के लिए। बस बहुत हो गया।अब अपने साथ ग़लतियों का बोझ लेकर घूमना छोड़ दीजिए। गुज़रे हुए वक्त की गलतियों के लिए बार-बार अफसोस करना बंद कीजिए। जिसके लिए आपको अभी भी अफ़सोस है। शायद पहले आप इतना अनुभवी और परिपक्व नहीं थे। तब आपको यह एहसास नहीं था कि क्या सही है और क्या गलत है। इसलिए अपने आपको माफ़ कर दीजिए और ख़ुद को इस बोझ से मुक्ति दीजिए। आपको यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि इंसान गलतियां करके ही सीखता है और उन्हीं गलतियों से सीखकर आज आप काफी अनुभवी और परिपक्व हो पाए हैं।

 दूसरों से भी माफी मांगें

और हां एक बात और अगर आपने किसी को नुक़सान पहुँचाने वाला कोई काम किया है और आपको अब भी उसका बुरा लगता है, तो आप उस व्यक्ति के पास जाकर या उसे ख़त लिखकर उससे माफ़ी माँग सकते हैं। उसे बताइए कि आपने जो कहा या किया उसका आपको अफ़सोस है। उसकी प्रतिक्रिया सकारात्मक हो या नकारात्मक, इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। केवल पश्चाताप व्यक्त करने और माफ़ी माँगने से ही आप आज़ाद हो जाएँगे।

देखिए दुनिया में ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं है, जिन्होंने केवल एक व्यक्ति के प्रति अपने ग़ुस्से और नफ़रत के कारण अपनी पूरी ज़िंदगी तबाह कर ली। उन्होंने इसे अपने दिलोदिमाग़ से जाने ही नहीं दिया और इसलिए वे इससे आज़ाद नहीं हो पाए। लेकिन अपने साथ ऐसा मत होने दीजिए। आपमें इतना साहस होना चाहिए, कि आप किसी को भी, बिना किसी अपवाद के माफ़ कर सकें। आपकी ज़िंदगी में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं होना चाहिए, जिसे लेकर आपके दिलोदिमाग़ में ग़ुस्सा हो। आपका दिमाग़ बिलकुल शांत और साफ़ होना चाहिए।

वीडियो देखें:


आपको इन्हें भी पढ़ना चाहिए




दोस्तों आशा करता हूं कि यह article आपके लिए काफी useful और life changing साबित होगी। अगर आपको यह article अच्छा लगा हो इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ भी शेयर करें। और हां यदि आपके मन में कोई उलझन है कृपया नीचे कमेंट करके जरूर बताएं हम उसका समाधान करने की कोशिश करेंगे। 
हमारे ‍ website पर आने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। 🙏

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ